— “…अब इतने साल हो गए उस बात को, तो उसका अब कोई मतलब नहीं रहा। अगर कुछ था भी, तो वो लड़की अब तक शादी कर चुकी होगी…” “सही कह रहे हो… चलो आज इसका रिश्ता भी पक्का करते हैं…” तेजस की एक न चली। जिस लड़की को घरवालों ने पसंद किया था, उसी से चुपचाप उसकी सगाई कर दी गई। घरवालों ने कह दिया था — “अगर कोई लड़की पसंद है, तो बता दो। नहीं तो हम अपनी पसंद से रिश्ता तय कर देंगे।” तेजस ने भी कह दिया — “शादी मैं एक साल बाद ही करूंगा…” — राजवीर की शादी हो चुकी थी। नैना अब घर की बहू बन चुकी थी। चुलबुली, नटखट, और बातूनी। वो एक बार बोलना शुरू करती तो पूरा दिन नॉनस्टॉप चलता। — “भाई, मेरी जेठानी कब ला रहे हो? मम्मी तो मुझे ताने नहीं देती, मगर जेठानी होगी तो उससे झगड़ा कर लिया करूंगी!” नैना ने सुबह-सुबह नाश्ते की टेबल पर कहा। “अगर झगड़ा ही करना है तो तुम्हारा पति मौजूद है। उसी से कर लिया करो!” तेजस ने मुस्कराकर जवाब दिया। “उनसे लड़ने में वो मज़ा नहीं जो जेठानी से झगड़ने में है! अब सोचो… मैंने सब्जी बनाई और जेठानी ने उसमें नमक ज़्यादा कर दिया। या मैंने चाय बनाई और उन्होंने उसमें मिर्च डाल दी! वो बनाएंगी, तो मैं उसमें नमक डालूंगी!” पूरा परिवार उसकी बातों पर हँस पड़ा। — “कुछ महीनों में शादी कर लूंगा नैना… फिर लड़ती रहना अपनी जेठानी से!” “लगता है मेरी ही बात हो रही है…” एक धीमी, मगर प्यारी सी आवाज़ आई। “आओ मीनल दीदी! हम आपकी ही बातें कर रहे थे। बस एक बार मेरी ऑफिशियल जेठानी बन जाओ, फिर हम दोनों मिलकर रोज़ सीरियल वाला सास-बहू ड्रामा करेंगे!” “मैं सास-बहू सीरियल नहीं देखती। बिलकुल पसंद नहीं हैं मुझे।” मीनल बोली। “तो फिर मैं दिखा दूंगी! आदत पड़ जाएगी!” नैना ने मुस्कराकर कहा। — तेजस खड़ा होने लगा। “कहाँ जा रहे हैं आप? आज आपको मेरे साथ चलना है। मैं लेने ही आई हूं।” मीनल बोली। “मैं ऑफिस जा रहा हूं…” “नहीं! मेरी सहेली की गोद भराई है आज। आपको मेरे साथ चलना होगा।” “ऐसे प्रोग्राम में मेरा क्या काम है? तुम नैना को ले जाओ…” “मेरी सारी सहेलियां आपसे मिलना चाहती हैं। मैं अपने डैशिंग मंगेतर को दिखाना चाहती हूं!” “प्लीज़ मीनल, ऐसा मत करो। बहुत ज़रूरी काम है ऑफिस में…” “चले जाओ बेटा। बच्ची दिल से बुला रही है। उसका दिल मत तोड़ो…” तेजस की माँ ने कहा। — मन नहीं था, लेकिन माँ के कहने पर तेजस मीनल के साथ चला गया। — गाड़ी में बैठते ही तेजस ने कहा: “मीनल, ज्यादा देर मत लगाना। मैं जल्दी निकलना चाहता हूं। मुझे ऐसी पार्टियों में कोई दिलचस्पी नहीं है।” “कम से कम मेरी सहेलियों से मिलने में तो होनी चाहिए। वो बहुत खूबसूरत हैं!” “तब तो बिल्कुल भी नहीं है…” तेजस बेहद इरिटेट हो रहा था। “इससे तो अच्छा था मैं पहले वाला तेजस होता, किसी की हिम्मत नहीं होती मुझे ऐसे घसीटकर ले जाए।” वह बड़बड़ाता रहा। — राहुल का फोन आया। तेजस ने उसे ऑफिस के सारे निर्देश दिए और जल्दी पहुंचने को कह कर फोन काट दिया। — “वैसे… मैं तो आपके बारे में बहुत कुछ सुन चुकी हूं।” मीनल ने ड्राइव करते हुए कहा। तेजस ने उसकी तरफ देखा: “क्या सुना है मेरे बारे में?” मीनल ने गाड़ी एक तरफ रोक दी। “अरे! गाड़ी क्यों रोकी?” “ये बताने के लिए कि क्या सुना है!” “बताओ फिर…” “सुना है कि आपकी ढेर सारी गर्लफ्रेंड्स थीं। रोज़ नई लड़कियों के साथ रिलेशन होते थे। मगर मुझे तो आज तक आपने गले भी नहीं लगाया… जबकि पहल हमेशा मैं करती हूं!” तेजस थोड़ी देर चुप रहा। “…हां, ये सब सच था…” “तो अब मुझसे दूर क्यों रहते हो?” “चलो अब, देर हो रही है। गाड़ी स्टार्ट करो। पार्टी नहीं जाना क्या?” मीनल हंसते हुए गाड़ी चलाने लगी। — कुछ देर में वो पार्टी पहुंच गए। गोद भराई की रस्म शुरू होने वाली थी। —
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— “…अब इतने साल हो गए उस बात को, तो उसका अब कोई मतलब नहीं रहा। अगर कुछ था भी, तो वो लड़की अब तक शादी कर चुकी होगी…” “सही कह रहे हो… चलो आज इसका रिश्ता भी पक्का करते हैं…” तेजस की एक न चली। जिस लड़की को घरवालों ने पसंद किया था, उसी…





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