— “हाँ, ये बात सच थी…” “तो फिर मेरे पास क्यों नहीं आते? हमेशा मुझसे दूर क्यों रहते हो?” मीनल की आवाज़ में नाराज़गी नहीं थी, बस एक मासूम सी शिकायत थी। “देखो मीनल, पार्टी में नहीं चलना है क्या? गाड़ी स्टार्ट करो, हमें देर हो जाएगी…” थोड़ी ही देर में दोनों पार्टी में पहुँच गए थे। गोद भराई की रस्म शुरू होने वाली थी। — “पहले मेरी सहेली को गिफ्ट दे देते हैं, फिर किसी एक साइड बैठकर बात करेंगे। मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है…” मीनल ने धीमे स्वर में कहा। तेजस ने सहमति में सिर हिलाया। वे दोनों लॉन के एक शांत कोने में जाकर बैठ गए। — “अब जवाब दो मेरी बात का।” “कौन सी बात?” “वही जो मैंने गाड़ी में पूछी थी। तुम मुझसे कभी करीब क्यों नहीं आते? जबकि मैंने सुना है कि तुम्हारे पहले ढेरों रिश्ते रहे हैं। अब ऐसा क्या हो गया कि तुम इतने शरीफ बन गए हो?” मीनल की बात में एक मुस्कान थी, मगर आँखों में सवाल। — “देखो, वो मेरा अतीत था मीनल… आज मेरी ज़िंदगी में सिर्फ तुम हो।” “यह तो मैं जानती हूँ… पर ऐसा क्या हुआ कि तुम पूरी तरह बदल गए? इतने बदल गए कि अब मुझसे भी दूर रहते हो, जबकि हमारी तो शादी होने वाली है…” तेजस ने ठंडी साँस ली और नजरें दूसरी ओर फेर लीं। “दूसरी तरफ क्या देख रहे हो? मुझे देखो और जवाब दो…” मीनल अब ज़िद पर उतर आई थी। — तेजस कुछ कहने ही वाला था कि उसे लगा — वो तपस्या है। कुछ दूरी पर खड़ी — उसकी आँखों के सामने। तेजस फौरन खड़ा हो गया। “क्या हुआ? अचानक खड़े क्यों हो गए?” मीनल ने पूछा। “नहीं… कुछ नहीं।” तेजस फिर से बैठ गया। पर उसका मन वहीं नहीं था। कुछ पल बाद वह बोला: “मैं वॉशरूम जा रहा हूँ…” — वो वॉशरूम की ओर बढ़ गया, पर उसका दिल उस अजनबी अहसास में डूबा था। क्या सचमुच वो तपस्या थी? इतने सालों बाद… अगर वाकई थी, तो वो एक बार उसे जरूर देखना चाहता था। वह चारों ओर नजरें घुमाकर उसे तलाश रहा था। जेंट्स वॉशरूम से बाहर निकलते वक्त एक लड़की से टकरा गया। — “सॉरी… मुझे दिखा नहीं…” वह कहते-कहते रुका। सामने वही चेहरा था — तपस्या। तेजस की आँखों में चमक आ गई। “तुम कैसी हो?” उसने गर्मजोशी से पूछा। मगर तपस्या के चेहरे का रंग उड़ गया था। बिना कोई जवाब दिए, वह तेज कदमों से आगे बढ़ गई। — “तपस्या! मैं तेजस हूं… क्या तुमने मुझे पहचाना नहीं?” वह उसके पीछे चलता गया। “मुझे आपसे कोई बात नहीं करनी है…” तपस्या ने सख्ती से कहा। तेजस वहीं रुक गया। — “…शायद वो डरती है कि मैं कुछ ऐसा ना कह दूं जो उसकी ज़िंदगी में तूफ़ान ला दे… उसकी शादी हो चुकी है शायद… इसलिए मुझे इग्नोर करना ही ठीक समझा उसने…” तेजस ने खुद को समझाया और वापस लौट गया। — पार्टी में लौटते ही, वह मीनल के पास गया। वहाँ रजनी का पति महेश बैठा था। “आओ तेजस! मैं आपकी ही वेट कर रहा था। अच्छा लगा कि आप आए।” तेजस मुस्कराया — पर वो मुस्कान अधूरी थी। उसकी नजरें फिर से तपस्या को खोज रही थीं। वो थोड़ी दूर एक टेबल पर बैठी थी, मीनल की सहेली के गिफ्ट्स सजा रही थी। — “वो लड़की — तपस्या — बहुत अच्छी है। मेरी बहन के ऑफिस की सहेली है। दिल्ली में रहती है। हर काम में बहुत हेल्प करती है। शायद तुम्हें जानती भी हो…” महेश तपस्या की तारीफ कर रहा था। — “आप उसे जानते हैं क्या?” महेश ने तपस्या की ओर इशारा करते हुए तेजस से पूछा। “हाँ… बहुत साल पहले वो मेरे ऑफिस में काम करती थी। मुझे लगा जैसे कहीं देखी हुई है… इसलिए गौर से देख रहा था।” “तो फिर मिलवा देते हैं आपको। रजनी को बुलाता हूँ…” — रजनी उनके टेबल पर आई। “तपस्या को भी साथ ले आतीं…” महेश ने कहा। “वो अंदर गिफ्ट्स रखने गई है। अभी बुला लेती हूँ…” फिर तपस्या को इशारा किया गया। — ना चाहते हुए भी तपस्या को आना पड़ा। “भाभी, कोई काम था?” तपस्या ने रजनी से पूछा। “नहीं, बस आओ बैठो हमारे साथ।” “मुझे नीता मैम बुला रही हैं… मुझे वहाँ जाना है…” तपस्या बात टाल गई और चली गई। — तेजस समझ गया — वह उसे इग्नोर कर रही है। “नीता मेरी बहन है… अब उसी के ऑफिस में काम करती है वो…” —
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— “हाँ, ये बात सच थी…” “तो फिर मेरे पास क्यों नहीं आते? हमेशा मुझसे दूर क्यों रहते हो?” मीनल की आवाज़ में नाराज़गी नहीं थी, बस एक मासूम सी शिकायत थी। “देखो मीनल, पार्टी में नहीं चलना है क्या? गाड़ी स्टार्ट करो, हमें देर हो जाएगी…” थोड़ी ही देर में दोनों पार्टी में पहुँच…





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