कबीर अपना सामान लेकर जैसे ही कमरे से बाहर हॉल में आया, उसने सुना कि हॉल के अंदर कुछ बातचीत हो रही थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। हॉल में प्रवेश करने से पहले ही उसकी कानों में बुआ की आवाज़ पड़ी। फुफ्फो हिना से कह रही थीं, “वैसे है ना, तुम्हारे तो नसीब पहले से ही हाथ के हैं। जो लड़का घर के बड़ों की नहीं मानता, कल को शादी के बाद तुम्हारी क्या सुनेगा? और हाँ, अरहान के लिए तो मुझे तुम ही पसंद हो, मगर मैं यह भी जानती हूँ कि तुम्हारी शादी तो बचपन से कबीर से तय है। उसकी नेचर कैसी है, यह तो घर में सबको पता ही है।” कबीर यह सब सुनकर ठिठक गया। उसे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा कि उसको  लेकर बातें हो रही हैं और हिना को बीच में लाया जा रहा है। वह गुस्से में हॉल के अंदर गया और डाइनिंग टेबल के पास पहुंचकर सख़्त लहजे में बोला, “फुफ्फो, आप इस सब के बीच हिना को मत लाएँ। इस निकाह के लिए मैंने आपसे मना किया था। तो फिर आप इसे बीच में क्यों ला रही हैं?” कबीर की अचानक मौजूदगी और उसके सख़्त लहजे से हिना चौंक गई। उसने कबीर की तरफ देखा, लेकिन कुछ कहा नहीं। “चलो ठीक है, मेरी बात सुनो,” उसके दादा जान ने कहा। “मैं तुम दोनों भाइयों की सगाई और निकाह की तारीख निकलवा लूंगा। जैसे ही तुम दिल्ली से वापस आओ, फिर सगाई और निकाह की तैयारी करेंगे।” कबीर ने सख़्ती से जवाब दिया, “मैं सिर्फ सगाई करूंगा। शादी अभी नहीं कर सकता।” “क्यों?” दादा जान ने गुस्से में पूछा। कबीर के अब्बा, अहमद साहब, भी अपनी जगह से खड़े हो गए। अब सबकी निगाहें कबीर पर थीं। हर किसी के चेहरे पर सवाल था, क्योंकि कबीर हर बात के लिए मना कर रहा था। जबकि सैयद साहब की बात का विरोध करने की हिम्मत किसी में नहीं थी। अयान, तैमूर और हवा—तीनों टेबल पर बैठे हुए एक-दूसरे को देख रहे थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहें। वे जानते थे कि घर के बड़ों की बातों में बीच में बोलना उनका हक नहीं है। घर की तीनों बहुंए—शफुगुप्ता, रिहाना और सलीम—भी चुप थीं। वे जानती थीं कि अगर उन्होंने बीच में कुछ कहा, तो दादा जान और दादी जान को गुस्सा आ जाएगा। कबीर का चेहरा अब भी गुस्से से लाल था। उसने धीमे स्वर में कहा, “आप लोग जानते हैं कि मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूँ।” — शाहरुख अभी-अभी जिम से लौटकर हॉल में आया ही था कि उसने देखा, शाहरुख अंदर प्रवेश कर रहा है। शाहरुख सीधा अपनी फूफी फरीदा और उनके शौहर फूफा जान रईस हुसैन  के पास गया। मुलाक़ात पर उसने झुककर कहा, “अस्सलामु अलैकुम, फूफी जान… फूफा जान.” फरीदा ने मुस्कुराकर जवाब दिया, “वअलैकुम अस्सलाम, बेटा शाहरुख!” फरीदा शाहरुख को देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने उसके हाथ थामकर कहा, “मैं तो तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी! तुम्हारे लिए बहुत बड़ी खुशख़बरी है!” शाहरुख थोड़ा उलझन में था। उसने एक-एक कर सभी के चेहरों की तरफ देखा। तभी सैयद साहब बोले, “बेटा, तुम्हारा मेहरुन्निसा के साथ रिश्ता तय हो गया है। जल्दी ही सगाई और फिर निकाह होगा।” शाहरुख कुछ कह पाता, उससे पहले फरीदा ने उत्साह से जोड़ दिया, “और सुनो—तुम अपनी खुद की फैक्ट्री लगाना चाहते थे न? तुम्हारे फूफा इसमें तुम्हारी मदद करेंगे। तुम्हारी खुद की कपड़ों की फैक्ट्री होगी! हमें पता है, यह तुम्हारा सपना है।” यह सुनते ही शाहरुख की आँखों में चमक आ गई। वह सचमुच अपनी फैक्ट्री शुरू करना चाहता था, लेकिन पैसों का इंतज़ाम नहीं हो पा रहा था। घर वाले मदद करने को तैयार तो थे, मगर पूरा निवेश उनके लिए मुश्किल था। अब फूफा जान के सहारे उसका सपना सच होने की उम्मीद जग उठी। हॉल में अभी-अभी खुशियों की हल्की चमक उभरी थी—फूफी फरीदा की बात सुनकर सबके चेहरे खिल उठे थे। सबसे ज़्यादा चमक तो शाहरुख के चेहरे पर थी। पर यह खुशी ज़्यादा देर टिक नहीं पाई; जैसे ही बात निकाह, रुख़सती और बिज़नेस पर आई, माहौल धीरे-धीरे भारी होने लगा। — दादा जान ने सीधे कबीर से कहा, “जब तुम सगाई के लिए तैयार हो, तो निकाह में देर क्यों? अगर तुम चाहो तो रुख़सती बाद में कर देंगे। मगर निकाह तो हो जाना चाहिए, बेटा।” कबीर ने बिना झिझक जवाब दिया, “मैं अभी सिर्फ सगाई करूंगा। निकाह और सगाई के बीच मुझे टाइम चाहिए।” दादा जान भड़क उठे। “क्यों? आखिर देरी किस बात की?” कबीर ने नज़रें मिलाईं, आवाज़ स्थिर रखते हुए कहा, “मुझे काम सँभालना है। सब कुछ एक साथ नहीं हो पाएगा।” — दादी जान ने बात संभालने की कोशिश की। “अरे, हिना का क्या? उसका तो यह एग्ज़ाम देकर ग्रेजुएशन पूरा हो जाएगा। कबीर ने दादी जान की ओर देखा— आगे से मास्टर्स भी कर सकती है। वैसे भी उसे लिटरेचर में दिलचस्पी है…” हिना को हैरानी हुई कि कबीर को हिना की पढ़ाई और शौक़ का इतना पता है। हिना भी डाइनिंग टेबल पर चुप बैठी थी, मन में हज़ारों सवाल लिए। कबीर की ये बातें सुनकर उसने धीमे से उसकी तरफ़ देखा—क्या सच में वह निकाह टाल रहा है… उसके लिए? या अपने लिए? दादी जान फिर बोलीं, “ठीक है, रुख़सती मत करो। मगर निकाह तो हो जाए?” कबीर ने गहरी सांस ली। “दादी जान,  एक बार निकाह हो गया तो आप सब रुखसती के लिए दबाव डालेंगं। “मैं जा रहा हूँ। गौतम मुझे लेने पहुँचने ही वाला है,” कबीर ने बात लगभग ख़त्म करने के अंदाज़ में कहा। दादा जान ने उसे रोका, “ऐसा क्या ज़रूरी काम है कि अभी जाना पड़ रहा है?” — सैयद साहब ने मेज़ पर बैठे वक़ार (हिना के अब्बा) की तरफ़ देखा। “वक़ार, तुम तो बेटी के अब्बा हो—कुछ तो कहो। निकाह होना चाहिए, नहीं?” वक़ार साहब ने भारी सांस ली। “अगर कबीर टाइम माँग रहा है, तो देना चाहिए। तब तक हिना अपनी मास्टर्स कर लेगी। वो आगे पढ़ना चाहती है।” उन्होंने बात यहीं रोक दी; वो अपनी बेटी के मन की बात जानते थे—वह जल्दीबाज़ी में निकाह नहीं करना चाहते थे। दादा जान अभी भी नहीं पिघले थे। “कौन सा काम है जिसके लिए इतना टाइम चाहिए?” कबीर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “आप लोगों को पता ही है—शहर में जो फाइव-स्टार होटल सेल पर है… मैं उसे खरीदना चाहता हूँ। अगर डील हो गई तो उसे खड़ा करने में जी जान लगानी पड़ेगी। साथ ही मैं राजनीति में भी किस्मत आज़मा रहा हूँ, और कारोबार भी देखना है। मैं चाहता हूँ कि शादी से पहले थोड़ा सेटल हो जाऊँ।” हॉल में सन्नाटा-सा छा गया। — पैसा कहाँ से आएगा? सैयद साहब ने  याद दिलाया, “पर उस होटल की डील तो कैंसिल हो गई थी…पैसों का इंतजाम करना मुश्किल था” कबीर बोला, “पैसों का इंतज़ाम करने ही तो जा रहा हूँ। शायद लोन सैंक्शन हो जाए। तब हम होटल खरीद सकेंगे।” — फूफी फरीदा की चिंता फूफी फरीदा ने बेचैनी से अपने भाई (सैयद/मिर्ज़ा साहब—परिवार के बड़े) की ओर देखा। “इतना बड़ा क़र्ज़? और अगर होटल नहीं चला तो? सारा बोझ पूरे खानदान पर पड़ेगा! तुम कोई सीधा-सादा काम नहीं कर सकते क्या?” फूफा जान रईस हुसैन ने तुरंत टोका, “फरीदा, तुम हर घरेलू मामले में मत कूदो।” फरीदा चुप कहाँ होने वाली थीं। “मेरी बेटी को इस घर में आना है! मैं नहीं चाहती कि किसी और की ग़लती का असर मेरी बेटी और उसके दामाद की ज़िंदगी पर पड़े। जो करना है करो—मगर अपने दम पर करो।” — सईद मिर्जा ने सख़्ती से कहा, “अगर लोन लेना है तो अपनी ज़मीन गिरवी (रेहन) रखो—पूरे खानदान की नहीं। मैं इस जोखिम में शामिल नहीं। वक़ार से पूछो—उसकी दो बेटियाँ हैं। उसे भी सोचना पड़ेगा।” माहौल अब बहस में बदल चुका था। कबीर को पहली बार लगा कि घर एक मिनट में कितनी तेज़ी से बाँट सकता है। फरीदा ने कहा, “मैं तो कहती हूँ, अब्बा जान, जो घर का बिज़नेस है—उसका बंटवारा तीनों भाइयों में कर दो। जिसे जैसा अच्छा लगे, अपना काम बढ़ाए।” रईस हुसैन ( हल्का गुस्सा लेकर) बोले, “फरीदा, तुम क्या-क्या कह रही हो?” “मैं बिल्कुल सही कह रही हूँ,” फरीदा अड़ी रहीं। सैयद साहब ने अब बात को आकार दिया: “हमारी तीन फैक्ट्रियाँ हैं। तो तीन हिस्से करो—तीनों भाइयों में बाँट दो। कपड़ों की दुकानें, दूसरी प्रॉपर्टीज—सबका हिसाब हो। अब्बा जान और अम्मी जान के हिस्से अलग रहें। बाकी हम लोग अपने-अपने बिज़नेस संभालें। कोई होटल में जाएगा, कोई फैक्ट्री देखेगा—कम से कम एक आदमी की वजह से सब डूबेंगे नहीं।” मिर्ज़ा साहब (घर के मुखिया) चुप बैठे सब सुनते रहे। उन्हें महसूस हुआ कि बहस अब आगे बढ़ती तो रिश्तों में दरार पक्की हो जाती। उन्होंने गहरी आवाज़ में कहा: “ठीक है… जैसा तुम लोग चाहते हो, वैसा ही होगा। बंटवारा कर देंगे। लेकिन घर—घर हमारा एक ही रहेगा। कोई अलग-अलग मकानों में जाकर जिए, यह मैं नहीं चाहता।” वक़ार ने धीमे से पूछा, “अब्बा जान, बंटवारा… कैसा?” “हिस्से के काग़ज़ बनेंगे,” सैयद साहब ने कहा। “सबका हिस्सा साफ़ होगा।” फिर उन्होंने चेतावनी दी, “और सुनो, यह जो कबीर कर रहा है—कहीं ऐसा न हो कि कल तुम लोगों को भी रिश्ता तोड़ना पड़े।” “भाई जान, यह क्या कह रहे हो आप!” वक़ार ने विरोध किया। — दादा जान ने आख़िरी कोशिश की: “कबीर, रुक जाओ। आज ही बातें साफ़ कर लेते हैं।” कबीर ने बैग उठाया। “जो आपको करना है, आप कर सकते हैं। मेरा स्टे यहाँ ख़त्म। गौतम गेट पर पहुँच चुका होगा। मैं दिल्ली जा रहा हूँ।” वह मुड़ा, एक बार सबकी तरफ़ देखा—और वह चला गया।


Discover more from So You Secrets with Ranj ✨ 🌿 कहानियाँ • ब्यूटी टिप्स • स्वादिष्ट रेसिपीज़ 🌿

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

कबीर अपना सामान लेकर जैसे ही कमरे से बाहर हॉल में आया, उसने सुना कि हॉल के अंदर कुछ बातचीत हो रही थी। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा। हॉल में प्रवेश करने से पहले ही उसकी कानों में बुआ की आवाज़ पड़ी। फुफ्फो हिना से कह रही थीं, “वैसे है ना, तुम्हारे तो नसीब पहले से…

Leave a Reply

Feature is an online magazine made by culture lovers. We offer weekly reflections, reviews, and news on art, literature, and music.

Please subscribe to our newsletter to let us know whenever we publish new content. We send no spam, and you can unsubscribe at any time.

← Back

Your message has been sent

Discover more from So You Secrets with Ranj ✨ 🌿 कहानियाँ • ब्यूटी टिप्स • स्वादिष्ट रेसिपीज़ 🌿

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from So You Secrets with Ranj ✨ 🌿 कहानियाँ • ब्यूटी टिप्स • स्वादिष्ट रेसिपीज़ 🌿

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading