अब जानवी उन तीनों को अनदेखा करते हुए अपने कमरे में चली गई। उसका मूड पहले ही बहुत खराब था और उन्होंने अपनी बातों से उसका दिल और दुखाया था।
उसने अपनी प्लाज़ो की पैंट से अपनी दवा निकाली, दो गोलियाँ मुँह में रख लीं और जोर-जोर से साँस ली। आँखों में आए आँसुओं को पोंछते हुए उसने थोड़ी देर बाद दवा का असर महसूस किया और वह शांत हो गई।
उसे अपने दादा जी की आवाज़ सुनाई दी। वे उसे बुला रहे थे। “जानवी, कहाँ हो तुम?”
वह अपने कमरे से बाहर आई। उसके दादा जी हाल में आ गए थे जहाँ सोनिया, तानिया और उसकी चाची बैठी हुई थीं।
“आपने मुझे बुलाया?” वह उनके पास आकर बैठ गई।
“हाँ बेटा। कल ही दिन है हमारे पास शॉपिंग के लिए। तो कल चलेंगे शॉपिंग करने। तुम्हारी सास ने एक स्टोर पर बुलाया है तुम्हें, तुम्हें वहीं जाना है। उसके बाद अपने लिए समान हमारी तरफ से भी ले लेना। तुम तीनों भी इसके साथ चली जाना,” दादा जी ने उन तीनों माँ-बेटी से कहा।
“मैं तो कल फ्री नहीं हूँ,” तनु ने कहा।
“और हमारे भी कॉलेज हैं,” उन दोनों ने भी साफ़ मना कर दिया।
“कोई बात नहीं दादाजी, मेरी सहेलियाँ हैं, मैं उनके साथ चली जाऊँगी। आप क्यों टेंशन लेते हो?” जानवी मुस्कुरा कर बोली। “आपको पता है चाची जी की कल डॉक्टर से अपॉइंटमेंट हैं और उनके कॉलेज में टेस्ट चल रहे हैं।”
“ठीक है, जैसा तुम लोगों को अच्छा लगे,” दादा जी ने कहा।
जानवी अगली सुबह जल्दी-जल्दी तैयार होकर घर से निकली। उसने अपने साथ अपनी दोनों सहेलियों रेणुका और प्रीति को बुला लिया था। वह अपनी ससुराल के अलावा अपनी खुद की तरफ़ से भी कपड़े लेने वाली थी। उसके दादा जी ने उसे अपना कार्ड दिया था; उन्होंने उसकी शादी के लिए पैसे इकट्ठा करके रखे थे, उसी से वह ज्वैलरी और कपड़े खरीदने वाली थी।
वह तीनों उस फ़ेमस डिजाइनर के स्टोर पर पहुँची जहाँ उन्हें जया ने बुलाया था। वह तीनों सहेलियाँ पहले ही पहुँच चुकी थीं, जबकि अभी तक जय राज की फैमिली से कोई नहीं आया था। वह शादी की ड्रेस देख रही थी, तभी जया वहाँ आई। उसके साथ उसकी दोनों छोटी बहुएँ रेखा और माला भी थीं।
वह दोनों जानवी से मिलीं। “हमारी तो बहुत चाहत थी कि हम अपनी होने वाली जेठानी से मिलें, पता तो चले जेठ जी किससे शादी कर रहे हैं,” रेखा ने कहा।
“चलो, शादी की ड्रेस ट्राई करो बेटा,” जया ने उसे कहा।
“मैंने ड्रेस देख ली है, मैं आपको पहनकर दिखा देती हूँ,” जानवी ने कहा।
जानवी वह लहँगा पहनकर आई। “मुझे यह पसंद है और मैंने साड़ियाँ भी देख ली हैं।”
“हमारे आने से पहले ही तुमने काम कर लिया? इतनी जल्दी?” माला कहने लगी।
“असल में मुझे अपने टेलर के यहाँ भी जाना है। मैंने कुछ शादी के लिए ड्रेस सिलवाने हैं। उसने कहा है कि जल्दी आकर दे जाना।”
“मगर जय आ रहा है, थोड़ी देर में पहुँचने वाला है,” जया ने कहा।
“मगर क्या जेठ जी पहुँचेंगे? टाइम होगा उनके पास?” रेखा जानबूझकर कहने लगी। “इन कामों में उन्हें इंटरेस्ट नहीं।”
“उन्हें तो शादी में भी इंटरेस्ट नहीं,” माला ने कहा।
“मेरा काम ख़त्म हो गया है। मुझे जाना पड़ेगा। आज ही का तो दिन है, कल शादी है। मुझे शॉपिंग भी करनी है। चाची जी और मेरी बहनें स्टोर पर मेरा इंतज़ार कर रही हैं।”
जानवी एक घंटे में पूरा काम निपटाकर स्टोर से बाहर निकल चुकी थी। रेखा और माला हैरानी से उसे देख रही थीं।
“तुमने झूठ क्यों बोला? कौन तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है?” प्रीति ने कहा।
“मैं जय के सामने नहीं आना चाहती थी, इसलिए ज़रूरी था वहाँ से निकलना।”
“और जब कल शादी होगी तब क्या करोगी? और तुम क्यों भाग रही हो? भागना तो उसको चाहिए जिसने गलती की है। तुमने क्या किया?”
“देखो प्लीज़, मैं पहले ही सुबह से दो बार दवा खा चुकी हूँ। मुझे स्ट्रेस मत दो। वह दोनों क्या कम थीं जो अब तुम शुरू हो गईं।” जानवी पहले घर से परेशान होकर आई थी, फिर वह रेखा और माला की वजह से परेशान हुई।
“तो कैसे रहोगी तुम उसे घर में? तुम्हारी देवरानियाँ तो बहुत बोलती हैं,” रेणुका ने कहा।
“बिल्कुल सोनिया तानिया जैसी लगीं मुझे,” प्रीति ने कहा।
“देखा जाएगा जो होगा। अभी मुझे शॉपिंग करनी है। चलें।” वह तीनों चली गईं।
एक घंटे बाद जय राज उस डिजाइनर के स्टोर पर पहुँचा। जब वह पहुँचा तो रेखा और माला दोनों अपने लिए कपड़े देख रही थीं।
“आ गए तुम,” जया ने उसे कहा।
जयराज ने इधर-उधर देखा, मगर उसे जानवी कहीं नहीं दिखी।
“भाई, आपकी बीवी तो कपड़े सेलेक्ट करके चली गई। आप लेट हो गए। ऐसा लगा जैसे वह कोई काम निपटा रही हो। हमें लगा नहीं था कि आप आयेंगे भाई, वरना हम उसे रोक लेते,” रेखा कहने लगी।
“चलो ठीक है। मैं चलता हूँ, मुझे काम है। मैं अपना काम छोड़कर आया था।” जय वहाँ से बाहर निकल गया।
वह समझ गया था कि वह उसका सामना नहीं करना चाहती और एक घंटे में कौन सी लड़की होगी शादी का लहँगा और शादी की साड़ियाँ सभी काम करके चली जाए। उसे शादी में कोई इंटरेस्ट नहीं। वैसे भी वह उनकी बातें सुन चुका था।
“चलो अच्छी बात है। तुम अपने आप को मानसिक तौर पर खुद ही तैयार कर रही हो हालात के लिए।”
वह वापस अपने आप ऑफिस की तरफ़ जाने लगा।
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अब जानवी उन तीनों को अनदेखा करते हुए अपने कमरे में चली गई। उसका मूड पहले ही बहुत खराब था और उन्होंने अपनी बातों से उसका दिल और दुखाया था। उसने अपनी प्लाज़ो की पैंट से अपनी दवा निकाली, दो गोलियाँ मुँह में रख लीं और जोर-जोर से साँस ली। आँखों में आए आँसुओं को…







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