सितारों से आगे एपिसोड 12

4–6 minutes

·

·

,

तुम तो बिल्कुल ठंडी हो रही हो। प्रीति ने जानवी से कहा।

जानवी ने एक नज़र अपने दादाजी की तरफ़ देखी। वे एक किनारे कुर्सी पर बैठे थे। वे अपने चेहरे से काफी रिलैक्स महसूस कर रहे थे।

तभी जय अंदर आया और उसके साथ उसका बेटा युग भी था। सभी की नज़र जय राज सिंघानिया पर गई। उसने क्रीम रंग की शेरवानी पहनी हुई थी और उसके साथ मैच करती शेरवानी युग ने भी पहनी थी।

सभी की नज़रें जयराज सिंघानिया पर गईं। क्रीम रंग की शेरवानी में वह बेहद हैंडसम लग रहा था। उसने अपने आँखों से गॉगल्स उतारे।

“मेरी मामा कहाँ है?” युग ने अंदर आते ही सवाल किया।

“तुम्हारी मामा उधर है।” राजन सिंघानिया ने जवाब दिया।

वह जय की उंगली छोड़कर, वहाँ एक कोने की तरफ़ जाने लगा। वहाँ कुर्सी पर जानवी भी बैठी थी। युग उसके नज़दीक पहुँचा तो जानवी ने एक मुस्कान के साथ उसकी तरफ़ देखा।

“आप मेरी मामा हो?” उसने बहुत प्यार से पूछा।

जानवी ने मुस्कुराते हुए अपना सिर हिला दिया।

“फिर चलो हम घर चलते हैं।” युग ने उसका हाथ पकड़ा।

“पहले हम तुम्हारे डैड से शादी तो करवा दें तुम्हारी मामा की।” जया ने मुस्कुराकर कहा।

उस कमरे में सभी लोग उन दोनों की तरफ़ देख रहे थे।

“अच्छा! अभी तक शादी नहीं हुई?”

“ठीक है तो चलो शादी करते हैं।” उसने जानवी से कहा।

जयराज आते ही सीधा रजिस्ट्रार ऑफिस के अंदर चला गया था। राजन और जया जानवी को साथ लेकर ऑफिस के अंदर जाने लगे। युग ने जानवी की उंगली पकड़ी हुई थी। जय और जानवी को छोड़कर, जय के माता-पिता और जानवी के दादाजी अंदर आए थे। जैसे ही उन दोनों ने साइन किए…

“मुबारक हो! आप दोनों पति-पत्नी हुए।” मैरिज रजिस्ट्रार ने कहा।

जयराज ने उसकी बात पर हल्की मुस्कान दी। उसने जानवी की तरफ़ देखा। वह नज़र झुकाए खड़ी हुई थी। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। वह सब लोग ऑफिस से बाहर आए। असिस्टेंट, मिस्टर मेहता, सबको मिठाई खिलाने लगा।

“सर, आगे का क्या प्रोग्राम है?” उसने जय से कहा।

“मॉम से पूछो। मुझे नहीं पता।” वह कहने लगा।

“अब हम मॉम को लेकर घर जाएँगे।” बीच में युग बोलने लगा। उसे डर था कि कहीं जानवी यहीं न रुक जाए।

जय सिंघानिया के घर पर उन दोनों के फेरों की रस्म का इंतज़ाम किया हुआ था और साथ थोड़े मेहमान भी आमंत्रित थे। मीडिया को बिल्कुल दूर रखा गया था।

वह लोग जैसे ही ऑफिस से बाहर सड़क पर आए…

“दादी मामा, अब तो मेरी मामा डैड के साथ ही जाएँगी।” युग कहने लगा।

“हाँ बेटा, हाँ।” जया ने जवाब दिया।

रेणुका और प्रीति दोनों जानवी के साथ थीं।

“आप दोनों कौन हैं? मेरी मामा के साथ क्यों हैं?” युग दोनों से कहने लगा।

“यह, तुम्हारी मॉम की सहेलियाँ हैं। ये दोनों तुम्हारी मौसी लगती हैं।” जया ने मुस्कुराकर कहा।

“आपके नाम क्या हैं?” युग पूछने लगा।

“ये रेणुका मौसी और प्रीति मौसी।” जानवी ने उसे धीरे से कहा।

जब जानवी युग से बात कर रही थी, उस समय जय जो थोड़ी सी दूर खड़ा था, अपने असिस्टेंट से बात कर रहा था। उसने जानवी और युग की तरफ़ देखा।

वह दोनों एक-दूसरे के साथ खड़े हुए थे। दोनों के ही चेहरों पर मुस्कान थी।

“तो प्रीति मासी और रेणुका मासी, आप दोनों भी हमारे साथ ही जाएँगी।”

“हम तो आपके मामा की बेस्ट फ्रेंड हैं, तो हमें साथ जाना चाहिए।”

“देखो, मेरी भी बेस्ट फ्रेंड है। मगर वह मेरे घर पर नहीं आती। बस मेरे स्कूल से वह अपने घर चली जाती है, मैं अपने घर आ जाता हूँ।” युग जानवी को छोड़कर किसी और को साथ नहीं ले जाना चाहता था।

उसकी बात पर जानवी, रेणुका और प्रीति तीनों हँसने लगीं।

“तो क्या तुम हमें साथ लेकर नहीं जाओगे?” प्रीति ने उसे कहा।

युग ने जानवी की तरफ़ देखा।

“मामा, क्या करना है? आपकी बेस्ट फ्रेंड कह रही हैं हमारे साथ ही जाएँगी।”

“जैसा तुम्हें अच्छा लगे।” जानवी ने उसे मुस्कुराकर कहा। प्रीति और रेणुका हँस रही थीं। प्रीति ने उसे गोद में उठा लिया।

तभी जया उन लोगों के पास आई।

“अभी तुम्हारे मामा-डैड की शादी बीच में रहती है। पूरी नहीं हुई अभी। सिर्फ़ कोर्ट में तो साइन हुए हैं। अभी पंडित जी इनको फेरे करवाएँगे और उसके बाद सभी अपने-अपने घर चले जाएँगे। अगर मामा की बेस्ट फ्रेंड को जाने के लिए नहीं कहोगे, मामा को बुरा लगेगा।”

“ठीक है, आप दोनों भी आ जाओ। मगर गाड़ी में तो मैं, डैड और मामा, हम तीनों ही जाएँगे। आप दूसरी गाड़ी में आ जाओ।”

फिर वह भागता हुआ जयराज के पास गया।

“क्या डैड, अब हम घर चलें मामा को लेकर? आप अंकल से बातें फिर भी कर सकते हो।”

“क्या बात है युग, आपको बहुत जल्दी है?” मिस्टर मेहता कहने लगा।

“और नहीं तो क्या? कितनी मुश्किल से मामा मिली है! अब हम घर ले जाएँ।” युग ने जय का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ ले आने लगा।

“डैड, आप गाड़ी ड्राइव करोगे। मामा आपके साथ बैठेंगी और मैं आप दोनों के पीछे, बीच में बैठूँगा।” जैसे हमेशा सभी बच्चे बैठते हैं। युग अंश और निशा की बात कर रहा था, क्योंकि जब भी वह अपने पेरेंट्स के साथ बाहर जाते थे तो ऐसे ही बैठते थे।

“आप अपने बेटे की फ़रमाइश पूरी कर दो।” राजन ने जय से कहा।

“ठीक है, चलो।”

जय के ड्राइवर ने गाड़ी ऑफिस के बिल्कुल सामने आकर लगा दी। जय ने उसे आँख से इशारा किया। वह चला गया। जया जानवी को जय की गाड़ी के पास ले आई। उसके साथ रेणुका और प्रीति भी थीं। युग को लगा कि रेणुका और प्रीति भी उनके साथ गाड़ी में न बैठ जाएँ।

“आप दूसरी गाड़ी में आ जाना। मैं ड्राइवर अंकल से कहता हूँ, वह आपको ले आएँगे।”

“ठीक है, नहीं आएँगे हम लोग तुम्हारे साथ। दूसरी गाड़ी में आ जाते हैं।” प्रीति ने मुस्कुराकर कहा। अब युग गाड़ी खोलकर पिछली सीट पर बैठ गया था। जय ड्राइविंग सीट पर बैठने लगा।


Discover more from So You Secrets with Ranj ✨ 🌿 कहानियाँ • ब्यूटी टिप्स • स्वादिष्ट रेसिपीज़ 🌿

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

तुम तो बिल्कुल ठंडी हो रही हो। प्रीति ने जानवी से कहा। जानवी ने एक नज़र अपने दादाजी की तरफ़ देखी। वे एक किनारे कुर्सी पर बैठे थे। वे अपने चेहरे से काफी रिलैक्स महसूस कर रहे थे। तभी जय अंदर आया और उसके साथ उसका बेटा युग भी था। सभी की नज़र जय राज…

Leave a Reply

Feature is an online magazine made by culture lovers. We offer weekly reflections, reviews, and news on art, literature, and music.

Please subscribe to our newsletter to let us know whenever we publish new content. We send no spam, and you can unsubscribe at any time.

← Back

Your message has been sent

Discover more from So You Secrets with Ranj ✨ 🌿 कहानियाँ • ब्यूटी टिप्स • स्वादिष्ट रेसिपीज़ 🌿

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading

Discover more from So You Secrets with Ranj ✨ 🌿 कहानियाँ • ब्यूटी टिप्स • स्वादिष्ट रेसिपीज़ 🌿

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading