sitaron se aage episode 108

डॉक्टर ने कहा कि थोड़े दिन अभी हैं उसके पास । वह लड़की जिद करने लगी के उसे इंडिया आना है। सच पूछो तो मुझे यह लगने लगा कि उस लड़की को कोई बीमारी ही नहीं है। जयराज ने कहा । अब वह मेरी और अपनी मॉम की शादी की बात करने लगी थी। मैंने प्रदीप मेहता से बात की । उसने मुझे कहा कि मैं जहां इंडिया ले आऊं और इनके साथ उनकी बिल्डिंग वाले फ्लैट में उन्हें रखूं । जहां पर हम उनकी निगरानी भी कर सकेंगे और असल मामला क्या है हमें पता चल जाएगा। और मैं तुम्हारी मॉम से भी बात करने वाला था। मगर मुझे समझ नहीं आ रहा कि जानवी  वहां तक कैसे पहुंच गई । “मैंने प्रदीप मेहता से बात की,” जयराज ने बताया। “उसने कहा कि मैं उसे इंडिया ले आऊं और उसे हमारी बिल्डिंग वाले फ्लैट में रखूं, ताकि हम उसकी निगरानी कर सकें और असली मामला समझ सकें।” “मैं तुम्हारी मॉम से भी बात करने वाला था,” वह युग की ओर देखकर बोला, “मगर मुझे समझ नहीं आ रहा कि जानवी वहां तक कैसे पहुँच गई।” — फोन की जाँच जयराज के हाथ में जानवी का फोन था। वह उसे घूरते हुए बैठा था। फिर उसने पासवर्ड डालकर फोन खोल लिया। जानवी का पासवर्ड ऐसा था जिसे पूरा परिवार जानता था — उसकी ज़िंदगी में कुछ ऐसा था ही नहीं जिसे वह किसी से छुपाती। जयराज ने कॉल लॉग चेक किया, पर कुछ भी असामान्य नहीं मिला। फिर उसने व्हाट्सएप खोला। ऊपर एक नंबर शो हो रहा था जिससे बहुत सारे मैसेज आए थे। जैसे ही उसने वह चैट खोली, उसकी आँखें चौंधिया गईं — उसमें जय राज की एक औरत के साथ कुछ वीडियो और तस्वीरें थीं। युवराज ने झट से दादा के हाथ से फोन छीन लिया। “क्या कर रहे थे आप? क्या देख रहे थे?” वह गुस्से से बोला। जयराज कुछ नहीं बोला, वह अब भी गहराई से सोच में डूबा हुआ था। “डैड मैं क्या देख रहा हूँ? इससे पहले कि यश और जूही जो भी घर आए, आप मुझे सब कुछ बता दीजिए!” युग ने कहा। “जैसा तुम सोच रहे हो, वैसा कुछ भी नहीं है,” जयराज ने गंभीर लहज़े में कहा। उसने फिर से फोन युग के हाथ से लिया और प्रदीप मेहता को थमा दिया। “इस नंबर की पूरी जानकारी चाहिए मुझे। पता करो ये कौन है, और कौन है जो मेरी हर मूवमेंट पर नज़र रख रहा है।” जयराज की आवाज़ ठंडी थी, लेकिन हर शब्द गहराई में डूबा हुआ। “ऐसा नहीं है कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। बहुत कुछ साफ़ हो गया है।” डैड, मुझे कोई बताएगा?” युग ने फिर पूछा। “तुम मुझ पर यकीन कर सकते हो। मैं कह रहा हूँ — जो इन तस्वीरों में दिख रहा है, वैसा कुछ भी नहीं है।” “मैं तुम्हारी माँ से बात कर लूंगा, फिर तुमसे भी करूँगा।” “मगर हाँ, एक बात साफ़ कह दूँ — जो औरत इन वीडियो में है, उसका नाम है दिव्या सेठी। वो अपनी बेटी और उसकी बीमारी को याद करके अक्सर रोती थी।” “जब भी मैं उसे संभालने और सहारा देने गया, तभी इन पलों की वीडियो बनाई गईं।” “अब मुझे पूरा यक़ीन है कि दिव्या सेठी ने कोई आदमी रखा है जो मुझे ट्रैक कर रहा है।” जयराज की आँखों में अब गुस्से की लपटें थीं। — योजनाएँ और ट्रैकिंग “अच्छा युग, ऐसा करो — ऊपर जाओ और मेरा लैपटॉप ले आओ।” “दादा, आप…” “मैं तुम्हारा दादा हूँ, और जो तुम्हारे लिए माँ है, वो मेरी जान है। मैं उसके बिना कुछ नहीं,” जयराज ने उसका गाल सहलाते हुए कहा। कुछ देर में युग लैपटॉप लेकर नीचे आ गया। “आप क्या कर रहे हैं?” युग ने पूछा। “तुम्हारी मॉम के मंगलसूत्र में ट्रैकर है।” “क्या?! आप पागल हो गए हैं? मॉम की कोई प्राइवेसी नहीं है?” “ये उसकी प्राइवेसी तोड़ने के लिए नहीं है। ये उसकी जान की हिफ़ाज़त के लिए है।” “सिर्फ तुम्हारी मॉम ही नहीं, तुम्हारी दादी माँ और मेरी बेटी की गाड़ियों में भी ट्रैकर है।” “तुम जानते हो, मेरे बहुत सारे दुश्मन हैं। और मेरी सबसे बड़ी कमजोरी क्या है, ये भी सब जानते हैं — ये तीनों औरतें मेरी ताक़त भी हैं और मेरी कमजोरी भी।” “इसलिए फिक्र मत करो बेटा, मैं हूँ ना।” — राजन की बेचैनी “ये सब मेरी वजह से हुआ,” राजन पछतावे में बोला। “आप फिक्र मत करो,” युग ने कहा। राजन ने किसी को फोन लगाना चाहा, पर जयराज ने उसका हाथ पकड़ लिया। “कोई मूवमेंट मत करना। मैं सब कुछ संभाल लूंगा। बस तुम लोग घर पर रहो और सेफ़ रहो।” “जूही को भी घर बुला लो — मैं नहीं चाहता कि मेरी बेटी किसी मुसीबत में पड़े।” “अगर आप कह रहे हैं, तो मैं यकीन करता हूँ,” युग ने कहा। “मगर मेरी माँ मुझे जल्दी से जल्दी चाहिए।” “क्यों फिक्र करते हो? मैं उसे ले आऊंगा,” जयराज ने भरोसा दिलाया। उधर, प्रदीप मेहता ने जो बात प्रीति को बताई थी, वो अब रेणुका को भी पता चल चुकी थी। दोनों उसी जगह पहुँच चुकी थीं — परी उनके साथ थी। “आप दोनों तो जानवी की हर बात जानती हैं न?” जय ने उन्हें देखते ही कहा। “हर बात?” प्रीति भड़क गई। “आप उसकी गाड़ी में ट्रैकर लगाते हैं? उसकी कोई प्राइवेसी नहीं है?” “आपकी निगाहें हर वक्त उस पर टिकी रहती हैं! क्या आप पागल हैं?” “वो मेरी सहेली है, और आप सिर्फ उसे कंट्रोल करना चाहते हैं!” — जयराज की शांत प्रतिक्रिया “मैं जा रहा हूँ डैड,” युग ने गुस्से से कहा। “प्लीज़, इन दोनों को संभालिए।” जयराज अपनी जगह से खड़ा हुआ और बस हल्के से मुस्कुराया। “आप मुस्कुरा रहे हैं? क्या आपको उसकी फिक्र नहीं?” प्रीति ने सवाल किया। “मेरी नज़रों से वो कहाँ जाएगी?” जयराज ने कहा। “आप लोग आराम से रहें। मैं सुबह वापस आऊँगा। अभी मुझे जाना है,” कहकर वह बाहर निकल गया।


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