“ठीक है। टाइम तो तुम ले सकती हो,” जयराज ने मुस्कुराते हुए कहा। “चलो अब कपड़े चेंज कर लो।”“यस मॉम, हम लोग नीचे हैं। आप लोग फ्रेश होकर आ जाइए, फिर साथ में लंच करते हैं,” बेटी ने कहा।“ठीक है,” जानवी ने कहा और राज के साथ ऊपर चली गई।जयराज ने जानवी का हाथ थामा हुआ था। जैसे ही वे कमरे में पहुँचे, जानवी ने अपना हाथ छुड़ा लिया और कहा, “ज़रूरत नहीं इसकी,” और वह ड्रेसिंग रूम में चली गई।जयराज हल्के से मुस्कराया। जानवी का यूँ रूठना… असल में यही उसके प्यार की गहराई थी।“उसे मनाना अब मुश्किल तो है, लेकिन नामुमकिन नहीं,” वह सोचने लगा।युग ने जैसे ही परी का नंबर मिलाया, उसके भीतर कुछ अजीब-सी हलचल हुई। फोन की घंटी बजी और जब दूसरी ओर से परी की आवाज़ आई, “हेलो युग?” आज उसकी आवाज़ में अपनापन था।युग ने बिना भूमिका के सीधा कहा, “परी… हमारे घर में हमारी शादी की तारीख़ तय हो रही है।” कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया, फिर परी ने बहुत धीमे से पूछा, “कब?” युग ने जवाब दिया, “मिलकर बात करते हैं।”अगली मुलाकात में, जब वे आमने-सामने आए, तो कोई औपचारिकता नहीं थी। दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा, हल्की मुस्कान के साथ हाथ मिलाए—जैसे वक़्त ने सब कुछ कहने की ज़रूरत ही ख़त्म कर दी हो। युग ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, “क्या बात है परी… तुम अब भी वही हो। पूरी तरह से बदल गई लगती हो।” परी ने आँखें झुका लीं, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी—जैसे वह उसी पल के लिए बनी हो। उन दोनों के बीच कोई शब्द ज़्यादा नहीं बोले गए, लेकिन उस हाथ मिलाने में एक वादा था… साथ निभाने का, हर मोड़ पर।”मुझे अगर पहले से पता होता कि मेरे इज़हार का तुम पर ऐसा होगा, तो शायद मैं बहुत पहले ही सब कुछ कह चुका होता।” युग ने कहा।”अब तो हमारे साथ-साथ यश की शादी की बातें होने लगी हैं। अगर वाकई ऐसा हो जाए, तो ये तो बहुत ही अच्छी बात होगी… मगर सवाल ये है कि लड़की कौन है? क्या कोई लड़की है जो उसे पसंद है?””आज शाम को सब कुछ साफ हो जाएगा। शाम को बात करता हूँ, पर मुझे तो लगता है कि उसे पहले से ही कोई लड़की पसंद है।””वो अक्सर उससे बातें करता है, और आज भी दोनों काफी देर तक वहीं बैठे रहे… बस बातें करते रहे…”यश अभी-अभी अपने कमरे से बाहर आया था। जैसे ही वह हॉल में पहुँचा, उसने देखा कि पूरी फैमिली पहले से ही वहाँ मौजूद थी।हॉल में जयराज सिंघानिया, जानवी, जया, राजन और युग—सभी साथ बैठे हुए थे। माहौल कुछ गंभीर भी था, और कुछ मुस्कुराहटों से भरा हुआ भी।जानवी (यश को देखकर मुस्कुराते हुए):”अरे, हम तो तुम्हारी ही बात कर रहे थे…”यश (थोड़ा चौंककर):”खैर तो है? आप सब को मुझसे कुछ बात करनी है क्या?”जया (हँसते हुए):”वो तो है ही… अब ज़रा इधर आओ।”यश हल्की मुस्कान के साथ दादाजी के पास जाकर बैठ गया। सभी की निगाहें अब उसी पर थीं।दादाजी (स्नेह से):”देखो बेटा, अगर तुम्हें कोई लड़की पसंद है, तो निडर होकर बता दो। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द तुम्हारी भी शादी हो जाए। सोच रहे हैं कि दोनों भाइयों की शादी एक ही मंडप में करवा दें।”जय:”बिलकुल सही कहा आपने डैड… अब तो वक्त आ गया है कि ये दोनों भाई अपना घर बसाएँ।”जानवी:”हाँ यश, बताओ ना… क्या तुम्हें कोई लड़की पसंद है?”जय ने यश की ओर देखा। सबकी नज़रों के बीच यश कुछ पल चुप रहा, फिर उसने नज़रे झुकाकर कहा—यश (धीरे और साफ़ आवाज़ में):”हाँ।”उसके इतना कहते ही कमरे में कुछ सेकंड की ख़ामोशी छा गई, फिर सभी के चेहरों पर एक हल्की मुस्कान आ गई।दादाजी (उत्सुकता से):”तो कौन है वो खुशकिस्मत? हमें भी तो पता चले…”यश (नज़रें मिलाते हुए):”आप सब अच्छी तरह से जानते हैं उसे… हमारे ही ऑफिस में जो क्लर्क का काम करते हैं देव, उनकी बेटी…”यश की बात पर युग और जयराज ने एक-दूसरे की तरफ देखा। दोनों की निगाहों में एक अनकही बात थी, जो सिर्फ वही समझते थे—जो यश नहीं जानता था।जयराज ने एक लंबी ठंडी साँस भरी और फोन उठाकर प्रदीप मेहता का नंबर मिलाया।”किसे फोन कर रहे हो?” राजन सिंघानिया ने अपने बेटे जयराज से पूछा।”दो मिनट रुकिए डैड,” जयराज ने कहा, और फिर फोन पर बोला, “प्रदीप, वो कुंदन श्रीवास्तव की जो फाइल थी… हाँ, हाँ, वही वाली। लेकर आओ, अभी… इसी वक्त।”पूरा हाल अब सन्नाटे में डूबा था। यश के साथ-साथ उसके दादा-दादी और जानवी की नज़रें अब जयराज पर टिक चुकी थीं।युग जानता था कि ये बात कहाँ जा रही है, लेकिन यश अब भी उलझन में था। वह बोल पड़ा, “आप सब क्या कर रहे हैं? कोई बताएगा मुझे?”जानवी ने धीरे से कहा, “अभी सब क्लियर हो जाएगा बेटा।”युग की नज़र अब अपनी माँ पर गई। “मॉम, आपको कुंदन श्रीवास्तव और माया श्रीवास्तव का केस याद है?””हाँ, जानवी।” जानवी ने गंभीरता से कहा।”यश की शादी का कुंदन श्रीवास्तव से क्या वास्ता?” राजन सिंघानिया ने माथा पकड़ते हुए कहा।युग ने धीरे से कहा, “बाप-बेटी दोनों उसी केस में इन्वॉल्व हैं।””तो अब तक वो देव… वो तुम्हारे ऑफिस में क्या कर रहा है?” राजन ने चौंक कर पूछा।”उसे जानबूझकर ऑफिस में रखा गया है, डैड। अभी तक उसने कोई सीधी गलती नहीं की है, इसलिए पकड़ा नहीं गया। हम बस यही चाहते हैं कि अगर वो कोई संदिग्ध गतिविधि करे, तो हमें तुरंत पता चल सके।””महक…” जानवी के चेहरे पर अचानक चिंता उभर आई, “उसे तो हम भूल ही गए थे।””सही बात है,” युग ने कहा। “हमारी नज़रें बस सामने वालों पर थीं,””आप ये सब क्या कह रहे हैं?” यश अब भी असमंजस में था।”दो मिनट रुक बेटा,” राजन सिंघानिया ने यश के कंधे पर हाथ रखा, “अभी फाइल आ जाएगी, सब कुछ तुम्हारे सामने साफ हो जाएगा।”


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“ठीक है। टाइम तो तुम ले सकती हो,” जयराज ने मुस्कुराते हुए कहा। “चलो अब कपड़े चेंज कर लो।”“यस मॉम, हम लोग नीचे हैं। आप लोग फ्रेश होकर आ जाइए, फिर साथ में लंच करते हैं,” बेटी ने कहा।“ठीक है,” जानवी ने कहा और राज के साथ ऊपर चली गई।जयराज ने जानवी का हाथ थामा…

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