रात को सभी काम निपट चुके थे। घर में सन्नाटा छा गया था और हर कोई अपने-अपने कमरों में जा चुका था।वारिस आज देर से घर लौटा था। खेत से आते-आते उसे देर हो गई थी—वह मजदूरों को समझा रहा था कि पानी किस खेत में कब लगाना है।घर आते ही वह सीधे ऊपर अपने कमरे में चला गया।थोड़ी ही देर बाद दरवाज़ा धीरे से खुला। उसकी अम्मी अंदर आईं। उनके हाथ में दूध का गिलास था।वारिस ने हल्की नाराज़गी से कहा,”मैंने आपसे कितनी बार कहा है अम्मी, मैं खुद किचन से ले आया करूँगा… आप बस मेरा गिलास वहीं ढक कर रख दिया करें।”अम्मी मुस्कुराईं, जैसे ये बात वह पहले भी कई बार सुन चुकी हों।”मुझे तुमसे एक बात करनी थी…”वारिस ने गिलास हाथ में लेते हुए कहा,”जी, कहिए…”वह उसके पास आकर बिस्तर पर बैठ गईं। वारिस धीरे-धीरे दूध पीने लगा।कुछ पल चुप रहने के बाद उन्होंने कहा,”आज तुम्हारे अब्बा और तुम्हारे ताया जान… तुम्हारे निकाह की बात कर रहे थे।”वारिस के हाथ हल्के से रुक गए, मगर उसने कुछ नहीं कहा।”फरहान की शादी को दो साल हो गए… वो तुमसे सिर्फ एक साल बड़ा है… और अब तो उसका बेटा भी है…”उन्होंने प्यार से बेटे को देखते हुए कहा,”तो मैंने सोचा… तुमसे भी बात कर लूं।”वारिस हल्का सा मुस्कुराया,”मुझसे क्या पूछना अम्मी… जो आपको पसंद हो…”अम्मी ने उसकी बात काटते हुए कहा,”मुझे पता है तुम मेरी पसंद से ही निकाह करोगे… फिर भी बताना जरूरी समझा।”थोड़ा ठहरकर उन्होंने कहा,”तुम्हारे अब्बा और ताया जान चाहते हैं कि तुम्हारा निकाह… आयारा के साथ हो।”दूध का गिलास होंठों से हट गया। वारिस ने पहली बार ध्यान से अम्मी की तरफ देखा।”आयारा…?””हां… नूर तो बड़ी है, मगर आयारा की जिम्मेदारी हमारी है। तुम जानते हो तुम्हारी फूफी की हालत…”वारिस कुछ पल सोचता रहा, फिर बोला,”वो मुझसे काफी छोटी होगी…”अम्मी हल्का सा हंस पड़ीं,”मैं तुम्हारे अब्बा से ग्यारह साल छोटी हूं… लड़कियां हमेशा लड़कों से छोटी होती हैं।”वारिस ने ज्यादा बहस नहीं की। बस हल्के से सिर हिलाया,”ठीक है… जैसा आपको ठीक लगे…”अम्मी उठ खड़ी हुईं,”मैं जैनब से भी बात कर लूंगी…”और यह कहकर वह कमरे से बाहर चली गईं।वारिस वहीं बैठा रह गया… गिलास उसके हाथ में था, मगर उसका ध्यान कहीं और चला गया था।है। असल में सलीम ने कुछ दिन पहले अपनी बीवी जैनब से नूर के रिश्ते की बात की थी। कई दिन गुजर गए थे, मगर जैनब ने इस बारे में वारिस से कोई बात नहीं की थी।सच तो यह था कि फरजाना को नूर ज्यादा पसंद नहीं थी। उसकी आदतें कुछ ऐसी थीं कि उस को वह कभी दिल से नहीं भा सकी।लेकिन आज जब सलीम ने आयारा का नाम लिया, तो फरजाना के चेहरे पर पहली बार सुकून दिखाई दिया।उसे आयारा बहुत पसंद थी—सीधी, मासूम और प्यारी बच्ची।वैसे भी फरजाना बेगम और जैनब के रिश्ते हमेशा अच्छे रहे थे। दोनों में अपनापन था, जबकि शमीमा के साथ उसका का रिश्ता कभी उतना गहरा नहीं बन पाया।इसीलिए जैसे ही आयारा की बात हुई, उस ने देर करना ठीक नहीं समझा और उसी रात वारिस से बात करने का फैसला कर लिया।उस वक्त आयारा अपने कमरे में नहीं थी।वह सीधा सना के कमरे में चली गई थी, क्योंकि आज रात उसे सना के पास ही सोना था।नूर तो हमेशा अपनी अम्मी के साथ ही सोती थी, जबकि आयारा उसकी अम्मी के कमरे में।घर में कमरों की कमी नहीं थी, मगर सोने के लिए कोई पाबंदी भी नहीं थी—जिसका दिल जहां करता, वहीं सो जाता।सना का कमरा अलग था। वहीं हिना का भी सामान रखा रहता था, हालांकि हिना अपने छोटे भाई सामी के साथ इस वक्त चंडीगढ़ में हॉस्टल में पढ़ते थे।हिना आठवीं क्लास में थी और उसका छोटा भाई सामी भी उसी के साथ पढ़ता था।असल में उन्हें हॉस्टल भेजने का फैसला तैमूर का था।तैमूर को पढ़ाई से बहुत लगाव था। वह समझता था कि पढ़ाई सिर्फ लड़कों के लिए नहीं, लड़कियों के लिए भी उतनी ही जरूरी है।उसकी सोच घर के बाकी मर्दों से अलग और खुली थी।इसीलिए उसने अपनी बहन को भी अपने भाई के साथ ही हॉस्टल में दाखिल करवाया।नासिर साहब तो वैसे भी ज्यादा दखल नहीं देते थे, और जब वारिस ने भी तैमूर के फैसले का साथ दिया, तो सलीम और राशिद चौधरी को भी आखिरकार मानना पड़ा।वारिस जानता था कि तैमूर समझदार लड़का है और हमेशा सही सोचता है।सना और आयारा बचपन से ही एक-दूसरे के बहुत करीब थीं।उनके बीच बहनों जैसा नहीं, बल्कि उससे भी गहरा रिश्ता था।इसलिए आयारा अक्सर उसी के पास आ जाती थी।उस रात भी वही हुआ।सना अपने बिस्तर पर बैठी स्कूल का होमवर्क कर रही थी, जबकि आयारा पास में बैठी एक किताब पढ़ रही थी—पिंजरकमरे में हल्की खामोशी थी…”तो बताओ… सच-सच… तुम्हें वारिस पसंद है न?”फरजाना बेगम मुस्कुराईं और जैनब की ओर देखती हुई बोली।जैनब के चेहरे पर अचानक खुशियों की चमक फैल गई।सबसे बड़ी बात—आयारा हमेशा उसकी आंखों के सामने रहेगी।उसकी बेटी… उसकी जिंदगी का सबसे अनमोल हिस्सा थी।जैनब ने धीरे से कहा,”ठीक है… ।मैं वारिस के अब्बा से बात कर देती हूँ। इनकी रोक- अभी कर देते हैं।और हाँ… निकाह सर्दियों में होगा।”दोनों नंद-भाभी इस खबर से बेहद खुश थीं।जैनब खुश थी—वारिस उसे पसंद था, और आयारा को भी किसी से पूछने की जरूरत नहीं थी।कभी-कभी खुशियां खुद ही आ जाती हैं, बिना बताए।जैसे दुख भी बिना कहे आता है, वैसे ही खुशी भी…आयारा की जिंदगी अब प्यार, खुशियां, इज्जत और हक से भरी होने वाली थी।सभी खुशियां उसके झोली में धीरे-धीरे आकर बसने वाली थीं…एक ऐसी झोली जिसमें अब कभी कमी नहीं होगी।आँखों में चमक, दिल में खुमारी,हर पल हो तेरी जिंदगी में नयी बहारी।हँसी तेरी फूलों की खुशबू लाए,हर लम्हा जैसे कोई गीत गुनगुनाए।प्यार की छाँव, धीरे-धीरे छाए,हर खुशी तेरी झोली में मुस्कुराए।चाँद की रौशनी, तारों का किनारा,तेरे हर सपने में बस प्यार का सितारा।
कतरा कतरा इश्क 7

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रात को सभी काम निपट चुके थे। घर में सन्नाटा छा गया था और हर कोई अपने-अपने कमरों में जा चुका था।वारिस आज देर से घर लौटा था। खेत से आते-आते उसे देर हो गई थी—वह मजदूरों को समझा रहा था कि पानी किस खेत में कब लगाना है।घर आते ही वह सीधे ऊपर अपने…






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