सितारों से आगे एपिसोड 35

4–6 minutes

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मेरे बहन-भाई।

“हाँ, मुझे एक-एक बहन चाहिए, भाई भी होना चाहिए,” वह सोचते हुए कहने लगा।

युग को जितने बहन-भाई चाहिए, उतने बच्चे होंगे हमारे। मगर अभी जानवी को अपनी पढ़ाई खत्म करने दो। बहुत छोटी है। जय ने मुस्कुराकर कहा।

रेखा ने जानबूझकर बच्चों की बात की थी। उन्हें लगा था कि जय साफ-साफ मना कर देगा बच्चों की बात पर। वह जानवी को अजीब स्थिति में डालना चाहती थी। साथ ही जानवी के मन में शक पैदा करना चाहती थी। मगर जय ने ऐसा नहीं कहा।

“जानवी, अब सीरियस होकर कॉलेज जाना शुरू करो। प्रीति की शादी के चक्कर में बहुत कॉलेज मिस हो चुका है।”

“ठीक है,” जानवी ने कहा।

खाना खाने के बाद तीनों ही ऊपर आ गए थे। जय पहले ऊपर आ चुका था, जबकि जानवी और युग बाद में आए थे।

“तुम दोनों थोड़ा-बहुत पढ़ भी लिया करो। मैंने तुम दोनों के हाथ में कभी किताबें नहीं देखी।” जय, जो सोफे पर अपनी कोई फाइल लिए हुए बैठा हुआ था, बोला।

“डैड, आप भी आजकल अपने ऑफिस की जगह घर पर ही काम करते हैं।” युग जाकर सोफे पर बैठ गया।

“क्या करूँ? मेरा अकेले वहाँ पर मन नहीं लगता।” जय ने उसे अपने साथ लगा लिया। जानवी उन दोनों की तरफ देखती हुई कपड़े बदलने चली गई। कपड़े बदलने के बाद वह युग के पास आई।

“चलो युग, तुम्हारे कपड़े बदलवा दूँ। और फिर सो जाओ, सुबह जल्दी उठना है। स्कूल जाना है।”

“नहीं मामा, मैं खुद बदलूँगा।” कहते हुए वह अपने कमरे की तरफ भाग गया। जानवी उसे जाता हुआ देखकर मुस्कुराई और उसके पीछे जाने लगी।

“हमेशा युग के साथ लगी रहती हो। कभी उसके डैड की तरफ भी देख लिया करो।” जय ने कहा।

“मैंने उसे समय तो दिया था। मुझे समय चाहिए और आपने भी कहा था कोई बात नहीं।”

“मगर यह तो नहीं कहा था कि युग के साथ सोना है रोज तुम्हें। ऐसे तो उसे तुम्हारी आदत पड़ जाएगी। फिर वह मुझे कब देगा तुम्हें? फिर तो वह अकेले कब्ज़ा कर लेगा अपनी मॉम पर।” वह उसकी तरफ देखते हुए शरारत से मुस्कुराया।

“आपको युग के साथ असुरक्षा महसूस हो रही है?”

“बिल्कुल हो रही है। शादी मैंने की, बीवी मैं लाया और पूरा कब्ज़ा अकेले उसका।” उसकी बात पर जानवी खिल-खिलाकर हँसने लगी।

“बात हँसने की नहीं है, मिसेज़ सिंघानिया। मुझे उन दिनों का इंतज़ार है, जब तुम्हारा भी मेरे बिना दिल नहीं लगेगा। आओ बैठो मेरे पास।”

वह जाकर सोफे पर बैठ गई। जय ने उसका हाथ पकड़ा और उसने बड़े प्यार से जानवी के चेहरे की तरफ देखा। “मुझे तुमसे प्यार हो गया है, तुम्हें मुझसे प्यार हो जाए। उस दिन का मुझे बेसब्री से इंतज़ार है।” उसने जानवी की नीली-नीली आँखों में देखते हुए कहा।

उसकी बात पर जानवी ने नज़र झुका ली।

“पता है तुम्हारी यही अदा तो मुझे मार डालती है। मुझे कोई रूचि नहीं थी, ना तुम में, ना तुम्हारे साथ शादी में। मगर पता नहीं क्या है तुम में। हर बार देखता हूँ और खिंचा चला आता हूँ तुम्हारी तरफ।”

“मुझे लगता है युग मुझे बुला रहा है।” जानवी को जय की बातों से शर्म आने लगी तो उसने बहाना बनाया।

“तुम्हारा यह बहाना बहुत पुराना हो गया मेरी जान। जब भी मैं तुमसे प्यार की बातें करता हूँ तब तुम्हें युग याद आ जाता है। अगर ज़रूरत होगी तो वह यहाँ आ जाएगा। मेरा भी तो हक़ है तुम पर।” उसने जानवी से कहा। फिर उसका हाथ पकड़कर अपने दिल की तरफ़ लगा लिया। जानवी के गाल गुलाबी होने लगे थे।

“ऐसे तुम्हारे गाल गुलाबी क्यों हो रहे हैं? तुम ब्लश कर रही हो।”

“नहीं, मैं कहाँ ब्लश कर रही हूँ।” जानवी ने अपनी गाल पर हाथ लगाया।

“ठीक है, जो जितना समय चाहिए, तुम ले लो। मगर तुम सिर्फ़ मेरी हो, याद रखना।” उसने आगे बढ़कर उसकी गाल पर किस किया। “इतने की तो आदत डालो जान।”

उसकी हरकत पर जानवी ने अपनी गाल को मसला। “आपकी मूँछें मुझे चुभती हैं।” कहती हुई वह खड़ी होने लगी।

जय का साथ उसे अच्छा लगता था। वह उसकी केयर करता था और उसे प्यार जताता था। जब भी वह प्यार की बातें शुरू करता, उसे बहुत शर्म आती। वह अक्सर वहाँ से भाग जाती।

जय अपने प्यार का इज़हार कर चुका था और साथ ही उसने कहा था कि उसे जानवी के इज़हार का भी इंतज़ार रहेगा।

जानवी ने उससे थोड़ा समय माँगा जो कि उसने आराम से दे दिया था। जानवी खुश थी। युग भी मामा-मामा करके उसके पीछे घूमता। वह अपनी दुनिया में खुश होने चली थी।

अगली सुबह जब प्रीति की आँख खुली तो काफी देर हो चुकी थी। उसे रात को नींद नहीं आई थी, ना ही उसने खाना खाया था। जो खाना मेड खाना लेकर आई थी वह वैसे ही पड़ा था। सुबह उठने पर उसका सिर भारी हो रहा था। वह अपने कमरे से बाहर आई तो आवाज़ सुनकर वह किचन में चली गई।

“मैडम, आप उठ गईं। आपको क्या चाहिए? कॉफ़ी? चाय?”

“मुझे पानी चाहिए।”

“आप हाल में चलिए। मैं लाती हूँ।” प्रीति किचन से हाल में आकर बैठ गई।

थोड़ी देर में मेड पानी लेकर आ गई। प्रीति का ध्यान कल रात घर की तरफ़ नहीं गया था। वह एक शहर के पाश इलाके में एक आलीशान बिल्डिंग में मिस्टर मेहता के फ्लैट में थी। जिसमें खूबसूरत तीन बेडरूम, ड्राइंग रूम, एक हाल और किचन के साथ एक जिम था और एक छोटा सा ऑफिस भी बना हुआ था।

प्रीति एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखती थी। घर तो उनका भी अच्छा बना हुआ था, मगर यह बहुत ज़्यादा खूबसूरत था। मिस्टर मेहता एक बहुत बड़े बिज़नेसमैन के असिस्टेंट थे, इस वजह से उनकी सैलरी भी बहुत ज़्यादा थी।


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