प्रदीप मेहता ने घर फोन लगाया।
“मैडम ने कुछ खा लिया है क्या?”
“हाँ, मैडम ने खाना खा लिया। उन्होंने सुबह खुद ही खाना माँगा था।”
“उनके खाने-पीने का ध्यान रखना। कल रात कुछ भी नहीं खाया था।” मिस्टर मेहता ने अपनी मेड लक्ष्मी से बात की। वह जानता था कि प्रीति की लापरवाही का असर बच्चे की सेहत पर पड़ेगा। वह बच्चा उसके वरुण की निशानी था।
जय राज जानवी के कॉलेज पहुँचा। उसने कॉलेज के बाहर अपनी गाड़ी पार्क की। चेहरे पर मास्क लगाया और आँखों पर गॉगल्स। वह मास्क लगाए पहुँचा था। वह नहीं चाहता था कि किसी को पता चले कि वह कहाँ है।
उसने कॉलेज के अंदर जाते ही जानवी को मैसेज किया।
“जान कहाँ हो तुम 💖”
थोड़ी देर में जानवी का मैसेज आया।
“कॉलेज😜 में हूँ और कहाँ!”
जय ने वापस मैसेज किया।
“वही तो मैं पूछ रहा हूँ। कॉलेज में कहाँ हो?”
जानवी का वापस मैसेज आया,😜 स्माइली के साथ।
“आप तो ऐसे पूछ रहे हैं जैसे कॉलेज के गेट पर हूँ! मैं कैंटीन में हूँ।”
“कहो तो मिलने😁 आ जाऊँ।” जय ने मैसेज भेजा।
“अगर पाँच मिनट में आ सकते हैं तो आ जाओ।” जानवी का मैसेज था।
जयराज कैंटीन के नज़दीक ही था। उसने कैंटीन की तरफ़ देखा। कैंटीन के बाहर जो बैठने की जगह थी, जानवी, रेणुका और साथ में दो लड़कियाँ बैठी हुई दिखाई दीं।
“अगर पाँच मिनट में पहुँच जाऊँ तो मुझे क्या मिलेगा?”
“क्या मिलेगा?” जानवी ने वापस मैसेज किया।
“क्या कर रही हो? किसे मैसेज कर रही हो? कब से फ़ोन पर लगी हो?” रेणुका ने उसे कहा। जानवी ने अपना मैसेज उसे दिखाया। वह भी मुस्कुराई।
जय राज का वापस मैसेज आया।
“बताओ तो सही क्या मिलेगा मुझे अगर मैं पाँच मिनट में पहुँच जाऊँ।”
“क्या चाहिए आपको 💖?” जानवी ने उसके मैसेज के जवाब में मैसेज किया, हार्ट की स्माइली के साथ।
“Kiss 👄” जयराज ने मैसेज भेजा।
मैसेज पढ़कर जानवी मुस्कुराई और उसने अपने सिर पर हाथ मारा।
जो लड़कियाँ दोनों उसके साथ बैठी थीं, जानवी को ब्लश करते देखकर उन्होंने भी कहा, “किसे मैसेज कर रही हो? बॉयफ्रेंड है क्या तुम्हारा?”
“मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है।” जानवी ने कहा।
“तो फिर कौन मैसेज कर रहा है? कब से तुम्हारा फ़ोन बज रहा है?”
जब जय राज को मैसेज का जवाब नहीं आया तो उसने फिर मैसेज किया, क्योंकि वह देख रहा था कि जानवी सामने वाली लड़कियों के साथ बातें करने में बिजी हो गई है।
जानवी ने थोड़ी देर सोचा और लिख दिया, “ठीक है। मगर पाँच मिनट में पहुँचना है।”
मैसेज लिखते हुए उसका चेहरा गुलाबी हो रहा था। वह उसे देखकर मुस्कुरा रहा था।
“कहीं वह कॉलेज में तो नहीं आया है?” जानवी ने सोचते हुए आस-पास देखने लगी। तब उसकी नज़र एक नज़दीक आते आदमी पर गई, जिसने मास्क लगाया हुआ था और गॉगल्स पहने हुए थे।
“तो यहाँ पर है।” जानवी ने अपने मन में कहा।
जिस तरफ़ जानवी देख रही थी, रेणुका भी उसी तरफ़ देखने लगी। रेणुका को भी उसकी पहचान आ गई थी। उसे दिन में कैफ़े में भी वह इसी तरह से आया था।
“तुम्हारे पीछे आया है।” रेणुका ने मुस्कुराकर कहा।
साथ बैठी दो लड़कियों ने भी उस तरफ़ देखा।
“कौन है?” उन दोनों में से एक लड़की ने कहा।
“दीवाना है इसका।” जानवी की बजाय रेणुका ने जवाब दिया।
“क्या कह रही हो?” जानवी ने उसे कहा।
“ठीक ही तो कह रही हूँ।”
जानवी को एकदम से मैसेज का ख्याल आया। वह एकदम से उसके बारे में सोचने लगी।
तब तक जय राज टेबल तक आ गया।
“हेलो ब्यूटीफुल गर्ल्स।” उसने अपनी आँखों के ऊपर से गॉगल्स निकालते हुए कहा। “चलो जानवी, चलें।” अब जानवी चुपचाप अपनी जगह से खड़ी होने लगी।
“आपको तो कहीं छोड़ना नहीं।” जय ने रेणुका से कहा।
“आप चलिए। मुझे लेने भाई आते ही होंगे। वैसे भी अभी एक पीरियड रहता है।”
जानवी चुपचाप जय राज के साथ चलने लगी।
“आप यहाँ क्या कर रहे हैं?”
“आपसे मिलने आया हूँ और लेने आया हूँ। और क्या?”
“मैंने मना किया था ना कि किसी को पता नहीं लगना चाहिए।”
“हाँ, तुमने कहा था कि हमारी शादी का किसी को पता नहीं लगना चाहिए। कह देना तुम्हारा बॉयफ्रेंड था, अगर किसी ने पूछा।”
जानवी ने उसकी तरफ़ बड़ी-बड़ी आँखें करके देखा। जय राज ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“सभी हमारी तरफ़ देख रहे हैं।” जानवी अपना हाथ छुड़ाने लगी।
“तो देखने दो, किसके बाप का डर है?”
जानवी ने फिर हाथ छुड़ाने की कोशिश की, मगर जय राज ने उसका हाथ नहीं छोड़ा।
“तुम्हें अपना प्रॉमिस याद है ना? जो तुमने अभी-अभी प्रॉमिस किया है।”
“कौन सा प्रॉमिस? ” जानवी ने हैरानी से कहा।
“अगर मैं पाँच मिनट में पहुँच जाऊँ तो…” जयराज ने उसकी तरफ़ देखा और अपनी आँखों पर फिर से गॉगल्स लगाने लगा।
“देखो, ये बात गलत है। आपको बताना चाहिए था कि आप कॉलेज में हैं।”
“और तुम्हें किसने कहा था कि पाँच मिनट की शर्त रखने के लिए?”
“जो प्रॉमिस किया जाता है उसे निभाना चाहिए।”
“ऐसा कौन करता है? अब मुझे क्या पता था कि आप ऐसा करने वाले।”
“अब ऐसे ही सरप्राइज़ के लिए तैयार रहो जान।” जय राज ने बड़े प्यार से कहा।
उसकी बात पर जानवी भी हँसने लगी। वह खुश थी। उसे लाइफ में इम्पॉर्टेंस मिल रही थी। उसे प्यार चाहिए था, वह मिल रहा था। वह उसके आगे-पीछे घूम रहा था, वह बहुत खुश थी।
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प्रदीप मेहता ने घर फोन लगाया। “मैडम ने कुछ खा लिया है क्या?” “हाँ, मैडम ने खाना खा लिया। उन्होंने सुबह खुद ही खाना माँगा था।” “उनके खाने-पीने का ध्यान रखना। कल रात कुछ भी नहीं खाया था।” मिस्टर मेहता ने अपनी मेड लक्ष्मी से बात की। वह जानता था कि प्रीति की लापरवाही का…







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