सितारों से आगे एपिसोड38

4–6 minutes

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और तुम्हें किसने कहा था कि पाँच मिनट की शर्त रखने को?

जो वादा किया जाता है, उसे निभाना चाहिए।

ऐसा कौन करता है?

अब मुझे क्या पता था कि आप ऐसा करने वाले थे?

अब ऐसे ही सरप्राइज़ के लिए तैयार रहो जान। जय राज ने बड़े प्यार से कहा।

उसकी बात पर जानवी भी हँसने लगी। वह खुश थी। उसे जीवन में महत्त्व मिल रहा था। उसे प्यार चाहिए था, और वह मिल रहा था। वह उसके आगे-पीछे घूम रहा था; वह बहुत खुश थी।

वह दोनों गाड़ी में आकर बैठ चुके थे।

“अच्छा, अपनी बात यहीं पूरी करोगी? जान, फिर कहीं और चला जाए।”

“क्या कह रहे हैं आप?” जानवी ने कहते हुए बाहर की तरफ देखना शुरू कर दिया। जयराज की बात का मतलब उसे समझ आ गया था, मगर वह जानबूझकर अनजान बनी रही।

“तुम अपना वादा पूरा करो,” जय ने फिर कहा। वह पूरे शरारत के मूड में था।

“नहीं, मेरे कहने का मतलब वह नहीं था,” जानवी सफ़ाई देने लगी।

“क्या मतलब था मैडम का?” जय ने फिर कहा।

“ठीक है, गाड़ी आगे ले चलिए।” फिर जानवी को लगा कहीं वह नाराज़ न हो जाए।

वह लोग वहाँ से आगे बढ़ गए। जय ने आगे जाकर गाड़ी फिर रोक दी। “चलो जानवी, जल्दी करो।” उसने अपना चेहरा जानवी के नज़दीक किया। जानवी ने उसके गाल पर किस किया।

“हो गया।” जानवी खुशी से कहने लगी। “आपकी मूँछें चुभती हैं।”

“गाल पर नहीं, होंठों की बात हुई थी। यह बात गलत है। तुम कहो तो मैं दाढ़ी और मूँछें दोनों कटा दूँगा। यह बात तुम मुझे पहले बता सकती थीं।” जय राज ने शरारत के साथ कहा।

“नहीं, कटाने की ज़रूरत नहीं।” जानवी ने जल्दी से कहा। “वैसे आपके चेहरे पर दाढ़ी और मूँछ जँचती है।”

“तो ठीक है, अगर तुम्हें पसंद है तो फिर नहीं कटवाऊँगा। जिस दिन तुम्हें लगे कि यह तुम्हें डिस्टर्ब कर रही हैं, तो मुझे बता देना।” जय राज अभी भी शरारत के मूड में था।

“आपकी दाढ़ी-मूँछ मुझे क्यों डिस्टर्ब करेगी?”

“मैंने होंठों पर किस करते हुए की बात की थी। किस करते हुए डिस्टर्ब न करे। होंठों पर किस करने की बात हुई थी।”

“होंठों पर किस की बात कब हुई थी? सिर्फ़ किस की बात हुई थी।”

“मैंने होंठों की स्माइली भेजी थी। चेक करो मैसेज।”

“जय, आप मुझे बातों में उलझा रहे हैं।”

“मैं नहीं उलझा रहा, तुम बात घुमा रही हो।”

“ठीक है।” जानवी ने कहा।

वह हैरान था। वह जल्दी मान भी गई।

उसने जानवी के नज़दीक चेहरा किया। जानवी भी उसके पास होने लगी, मगर उसने किस करने की जगह उसके कंधे में अपना चेहरा छुपा लिया।

जय ने भी उसे अपनी दोनों बाहों के घेरे में ले लिया और उसकी गाल पर किस किया। “मुझे कोई जल्दबाजी नहीं है। मैं तो मज़ाक कर रहा था।”

“मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। सिर्फ़ शर्म आ रही है।” जानवी ने धीरे से कहा।

“क्या कहा?” उसने जानवी से थोड़ा दूर होते हुए कहा। “मुझे सुनाई नहीं दिया।”

“जय, मुझे तंग क्यों कर रहे हैं?” वह वापस बाहर देखने लगी। “मुझे बहुत भूख लगी है। मैंने लंच नहीं किया। अभी भी जो खाने वाली थी, वह छोड़कर आ गई।” उसने बात बदली। उसे सचमुच बहुत भूख लग रही थी।

“चलो, क्या खाना है मेरी जान को?” जय ने हँसते हुए कहा। “मगर मेरा किस नहीं भूलना।”

जानवी ने आँखें निकालकर उसकी तरफ़ देखा क्योंकि वह एक बात का पीछा नहीं छोड़ रहा था।

दोनों एक रेस्टोरेंट में गए। लंच करने के बाद जय ने कहा, “बोलो, क्या प्रोग्राम है? घर चलें, या हनीमून के लिए यहीं पर कोई रूम बुक करें?”

“आप मुझे फिर तंग कर रहे हैं।” जानवी ने उसकी बात पर कहा।

जयराज हँसा। “पता है, घर पर तो तुम्हारा लाडला होगा। वहाँ पर मैं तुम्हें कहाँ दिखाई देता हूँ? बड़ी मुश्किल से मेरी बीवी मानने लगी है।”

वह दोनों ही इस बात से अनजान थे कि कोई उनकी तस्वीरें खींच रहा है। किसी को पता था कि आज जय राज सिंघानिया बिना सिक्योरिटी के आया है। जय राज सिंघानिया सिक्योरिटी के बिना कहीं अकेला जाता तो हमेशा आसपास का ध्यान रखता था, मगर आज वह जानवी के साथ इतना बिज़ी था कि उसे आसपास का कोई ध्यान ही नहीं रहा। वह अपनी खुशी में अपने ऊपर के खतरों को भूल गया था।

“आप कहते हैं, मैं युग के सामने आपको इग्नोर करती हूँ?” जानवी ने नकली गुस्से से कहा।

“और नहीं तो क्या? अच्छा, सुहागरात बाद में मनाएँगे। मेरा किस तो ड्यू है ना?” जय ने फिर किस वाली बात शुरू कर दी।

“हाँ।” जानवी ने इधर-उधर देखते हुए कहा। उसे जय राज की तरफ़ देखने में शर्म आ रही थी। वह जय राज के साथ नज़र नहीं मिलाना चाहती थी।

“चलो फिर घर चलते हैं। वहाँ जाकर किस करेंगे।”

“नहीं, मूवी देखनी है। चलें क्या? बहुत अच्छी मूवी लगी है।” जानवी ने कहा।

“अब मैं तुम्हें मना तो कर नहीं सकता। चलो मूवी देखने चलते हैं। बहुत साल हो गए मैंने थिएटर में मूवी नहीं देखी। आज फिर देखते हैं तुम्हारे साथ।”

“युग घर आ गया होगा। उसे भी साथ ले लेते हैं।” जानवी ने टाइम देखते हुए कहा।

“बिल्कुल भी नहीं। नैनी और मोम हैं उसके पास। कुछ वक़्त हम दोनों का भी तो होना चाहिए।”

वह दोनों मूवी देखने चले गए।

दोनों बहुत खुश थे। दोनों ने एक-दूसरे को मन से कबूल कर लिया था। अब दोनों एक-दूसरे के साथ ज़िन्दगी का नया सफ़र शुरू करना चाहते थे, जिसके लिए जानवी और जय दोनों ही तैयार थे।


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