युग घर आ गया होगा। जानवी ने समय देखते हुए कहा, “उसे भी साथ ले लेते हैं।”
“बिल्कुल भी नहीं,” जानवी ने कहा, “नैनी और मोम उसके पास हैं। कुछ वक्त हम दोनों का भी तो होना चाहिए।”
वह दोनों मूवी देखने चले गए। दोनों बहुत खुश थे। दोनों ने एक-दूसरे को मन से कबूल कर लिया था। अब दोनों एक-दूसरे के साथ जीवन का नया सफ़र शुरू करना चाहते थे, जिसके लिए जानवी और जय दोनों ही तैयार थे।
मूवी देखने के बाद वे दोनों घर पहुँचे। गाड़ी की आवाज सुनते ही युग घर के अंदर से बाहर आया। “आप लोग इतनी देर कहाँ रह गए थे? माम का कॉलेज तो कब का खत्म हो गया। कॉलेज में तो छुट्टी जल्दी हो जाती है।” उसने दोनों की उंगली पकड़ ली थी।
जयराज ने युग को अपनी गोद में उठा लिया। “वह क्या? तुम्हारी मॉम को मैंने पहले खाना खिलाया और मूवी देखने ले गया। इसलिए टाइम लग गया।”
“मोम, आपने डैड से यह नहीं कहा कि युग को साथ ले लेते हैं? मुझे भी फिल्म देखनी थी,” युग ने कहा।
“बेटा, असल में वहाँ पर बच्चे नहीं थे, इसलिए आप रह गए।” जानवी ने युग का हाथ पकड़कर, जो जय की गोद में था, चूमा। “नेक्स्ट टाइम हम तीनों इकट्ठा मूवी देखकर आएंगे।”
“हाँ, बिल्कुल। लाइन किंग वाली मूवी आने वाली है। मेरे दोस्त ने बताया मुझे।” वे तीनों बातें करते हुए हाल के अंदर आ गए थे।
समर, जो हाल में राजन के साथ बैठा था, ने पूछा, “भाई, आप कहाँ चले गए थे? ऑफ़िस से तो आप कब से निकले हैं?”
“तुम्हारी भाभी को आज कॉलेज से लिया मैंने। फिर हम लोगों ने फिल्म देखी, इसलिए टाइम लग गया।” वे लोग वहीं हाल में बैठ गए।
राजन ने उन दोनों से कहा, “मुझे लगता है तुम दोनों को घूमने के लिए भी थोड़ा वक्त निकालना चाहिए। एक हफ़्ते के लिए हनीमून पर चले जाओ।”
युग सबसे पहले बोला, “फिर मॉम, हम कहाँ चलेंगे?”
जया, जो लोगों के पास आ रही थी, ने कहा, “इस बार मॉम-डैड अकेले जाएँगे। तुम हमारे पास रहोगे।” उसके साथ मेड थी जिसके हाथ में चाय की ट्रे थी।
जानवी ने कहा, “नहीं, जब हम जाएँगे, युग हमारे साथ जाएगा। इसके बिना मॉम कैसे जाएगी?”
जय ने कहा, “वैसे मॉम की बात सही है। हम दोनों कहाँ चलते हैं ना कहीं?”
युग अपनी जगह से उठकर जानवी की गोद में बैठ गया। “मॉम तभी जाएगी जब मैं साथ में जाऊँगा। वरना आप अकेले चले जाओ।” वह गुस्से से बोला। उसकी बात पर सभी हँसने लगे।
जानवी ने भी कहा, “सही बात है। युग के बिना मैं नहीं जा सकती।”
जय ने मुस्कुराकर कहा, “ठीक है भाई, हम तीनों चलेंगे।”
सभी बैठे हँस रहे थे। तभी वहाँ पर रेखा और उसके साथ एक लड़की आई।
उस लड़की ने जय से पूछा, “कैसे हैं आप?”
रेखा कहने लगी, “जानवी, इनसे मिलो। यह मेरी छोटी बहन खुशी है।”
वे सभी बातें कर रहे थे कि जयराज उनके बीच में से खड़ा हो गया। “मैं थोड़ी देर रेस्ट करना चाहता हूँ और मुझे काम भी है।” वह ऊपर चला गया।
जया ने जानवी को भी भेज दिया, “जाओ बेटा, तुम भी चेंज कर लो।”
युग और जानवी दोनों ऊपर आ गए थे, मगर युग वापस चला गया। अब जानवी और जय अकेले थे। जैसे ही जय ने देखा कि युग चला गया है, वह दरवाजे के पास गया और उसने दरवाजा लॉक कर दिया। जानवी, जो चेंज करने के लिए जाने वाली थी, ने देखा कि जय दरवाजा लॉक कर रहा है।
जानवी ने कहा, “आप दरवाजा लॉक क्यों कर रहे हैं? युग अभी आ जाएगा।”
जयराज, उसके पास आते हुए बोला, “इसीलिए तो लॉक किया है। मुझे भी तुम्हारा अकेले में थोड़ा सा टाइम चाहिए। मैंने सोचा कुछ वक्त मैं मिसेज़ सिंघानिया के साथ अकेला बिता लूँ। तुम्हें तो हर वक्त युग की फ़िक्र रहती है, मेरी भी तो फ़िक्र किया करो।” वह बिल्कुल उसके नज़दीक आ गया।
जानवी जानबूझकर उसे इग्नोर करती हुई ड्रेसिंग रूम में चली गई और अलमारी खोलकर अपने कपड़े निकालने लगी। वह उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने उसके पीछे से उसके पेट पर अपनी बाहें रखीं और उसके कंधे पर चिन्ह रखते हुए बोला, “क्यों इग्नोर करती हो यार मुझे?” फिर उसने जानवी की गर्दन पर किस किया।
“जय,” जानवी ने कहा। उसकी आँखें बंद होने लगी थीं। जय की नज़दीकी उसके लिए इतनी जानलेवा थी, उसने सोचा नहीं था।








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