मुझे लगा कि उसकी नई-नई शादी हुई है, उसे डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए। फिर उसकी कंडीशन भी हम लोग जानते हैं।
“कोई बात नहीं,”
“ठीक है, मैं आ रही हूँ। तुम मुझे पिक कर लेना।”
“तुम तो कह रही थी तुम्हें शादी ही नहीं करनी, अभी तुम्हें तो करियर बनाना है। उसे दिन जय के सामने कितनी बड़ी-बड़ी बातें कर रही थी तुम!” होटल की पार्किंग में उतरते हुए जानवी ने रेणुका से कहा।
“मैं शादी नहीं करना चाहती हूँ, मगर क्या करूँ? मॉम के किसी सहेली का बेटा है। उन लोगों ने मुझे कहीं देखा था, विदेश में रहते हैं।”
“तुम्हें बाहर-बाहर सेट होना है, इसीलिए तुम शादी करना चाहती हो?” जानवी कहते हुए एकदम से रुक गई। उसका ध्यान कहीं और चला गया।
“यह गाड़ी तो जय की है।” उसने गाड़ी की तरफ़ देखते हुए कहा।
“तो जीजू भी यहीं आए होंगे। उनसे भी मिल लेंगे।”
“नहीं, रहने दो। तुम जय को फोन मत करो।” रेणुका जो जय को फोन लगाने लगी थी, जानवी ने रेणुका को रोका। “हम जिससे मिलने आए हैं, उसी से मिलेंगे। तुम अपनी बात बताओ। तुम हमेशा के लिए देश छोड़कर जाओगी।”
“ना तो मुझे शादी करनी है और ना ही उस मॉम की सहेली के बेटे में कोई इंटरेस्ट है।”
“वह लोग घर भी तो आ सकते थे, यहीं पर क्यों आए?”
“बस पूछो मत। घर आए थे, मैं बाहर थी, मैं घर पर नहीं थी। इसीलिए उन्होंने मुझे जहाँ पर खाने पर इनवाइट किया है! एक्चुअली वह चाहता है कि मैं उसके साथ अकेले टाइम स्पेंड करूँ। मैं उसके साथ अकेले नहीं रहना चाहती, तो तुम्हें बुला लिया है।”
“तुम उसे अभी तक मिली नहीं हो?” जानवी ने पूछा। वो दोनों लिफ्ट में आ चुके थे, टॉप फ्लोर पर जाने के लिए।
“तस्वीर देखी होगी। कैसा है?”
“माँ ने दिखाई थी, मैंने देखी ही नहीं।” वह लोग लिफ्ट से टॉप फ्लोर पर इंटर करते हैं।
वैसे इतने आलीशान होटल में ठहरे हैं तो काफी अमीर होंगे। तुम्हें पता है ना यह हमारे शहर का सबसे महँगा होटल है और मैंने सुना है यह जो टॉप फ्लोर है, यह तो बहुत एक्सपेंसिव है।
“तुम्हें क्या फर्क पड़ता है? तुम तो मिसेज़ जय सिंघानिया हो, कुछ भी खरीद सकती हो।”
“ठीक है, मैं यह नहीं कहती कि मैं मिसेज़ जय सिंघानिया नहीं हूँ, फिर भी मतलब तुम्हारा… वह भी काफी अमीर है। मुझे लगता है कि उसने होटल में तुम्हें इसलिए बुलाया है ताकि वो तुम्हें दिखा सके।”
“हो भी सकता है। चलो देखते हैं क्या होता है।” वह रूम नंबर देखती हुई आगे की तरफ़ जा रही थी।
“रूम नंबर तो याद है ना?” वह दोनों बातें करते हुए जा रही थीं। तभी वह एक कमरे के आगे से गुज़री तो, रूम से निकलने वाली लड़की से जानवी टकराते-टकराते बची।
“सॉरी, मैंने देखा नहीं।” उसे टकराने वाली लड़की ने कहा।
“तुम…?” जानवी ने कहा। वह लड़की खुशी थी। खुशी उसे देखकर घबरा गई।
“कैसी हो खुशी तुम?” जानवी ने उसे पूछा।
“मैं ठीक हूँ। तुम तो अपने मायके गई थी ना?” उसने कहा।
“हाँ, मैं वहीं से अपनी सहेली के साथ आई हूँ।” वह वहीं खड़े होकर बातें करने लगी। “यह मेरी सहेली रेणुका है और यह रेखा भाभी की छोटी बहन खुशी है।” वह दोनों एक-दूसरे से मिलती हैं।
“मुझे काम है, मैं जा रही हूँ।” खुशी जल्दी से वहाँ से जाने लगी। खुशी जिस कमरे से निकली थी, उस कमरे का दरवाज़ा आधा खुला हुआ ही छोड़ गई थी। वहाँ से गुज़रते हुए जानवी की भी नज़र कमरे में गई। पहले तो जानवी आगे चली गई, मगर वह वापस पीछे मुड़कर पीछे की तरफ़ देखने लगी।
“क्या कर रही हो तुम?” रेणुका ने उसे ऐसे देखते देखकर पूछा।
“मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कमरे में जय है?”
“जय कहाँ पर कैसे होगा? वह तो खुशी का बॉयफ्रेंड होगा, जहाँ से तो खुशी गई है।”
जानवी उस खुले हुए कमरे के अंदर जाती है तो उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है। वहाँ पर जयराज बेड पर सोया हुआ था। उसने अपनी शर्ट नहीं पहनी हुई थी। कमरे में फूल बिखरे हुए थे, वहाँ पर शराब की खाली बोतल पड़ी हुई थी, जली हुई सिगरेट थी और खाने-पीने का सामान पड़ा था। बेड के नीचे जयराज का ब्लेज़र और उसकी शर्ट पड़ी हुई थी।
“लगता है ये नशे में है।” उसे देखकर रेणुका ने कहा। फिर उसने जानवी की तरफ़ देखा। जानवी को साँस लेने में प्रॉब्लम हो गई थी, उसे पैनिक अटैक आया था।
“जानवी!” रेणुका ने घबराकर कहा।
“तुम्हारी दवाई है तुम्हारे पास?” रेणुका ने पूछा।
“नहीं।” जानवी ने हाथ हिलाया।
रेणुका की आवाज़ सुनकर जयराज ने आँखें तो खोलीं, मगर वह देखकर फिर सोने लगा।
रेणुका उसे वहीं छोड़कर, जिन लोगों से वह मिलने आई थी, उनके पास पहुँची। वो उस लड़के को बुला लाई। जयराज ने भी उठने की कोशिश की, मगर वह इतने नशे में था कि वह उठ नहीं सका। नशे की वजह से उसे दिखाई भी नहीं दे रहा था। रेणु उस लड़के की हेल्प से जल्दी से जानवी को हॉस्पिटल लेकर जाती है।








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