सितारों से आगे एपिसोड 46

5–8 minutes

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वह भी उसी का सहायक था।

“संभलकर रहना।”

मैं जानवी से मिलकर आई हूँ।

“अभी उसे आराम करने दो। फिर चली जाना। मैं घर जा रही हूँ।”

रेणुका चली गई। प्रीति वहीं बैठी सोचने लगी। उसे जय से ज़्यादा गुस्सा प्रदीप मेहता पर आया था।

“मैंने कैसे आदमी के साथ शादी की है! वह एक आराम पसंद आदमी के लिए काम करता है।”

उसी वक्त घर का दरवाज़ा खुला। प्रदीप मेहता आया था। उसने पासवर्ड से लॉक खोला और अंदर आ गया। उसने प्रीति को बैठी हुई देखा। प्रीति भी उसकी तरफ देख रही थी।

“क्या बात है? आप ठीक तो हैं ना?” उसने उसके पास आकर पूछा।

“यह क्या हो रहा है?”

प्रदीप मेहता समझ गया था कि वह किसके बारे में बात कर रही है।

“रेणुका आई थी यहाँ पर।”

“अच्छा,” प्रदीप मेहता ने कहा।

“आप यह नहीं पूछेंगे कि वह क्यों आई थी?”

“जानता हूँ।”

“यह सब क्या है? जयराज ने ऐसा क्यों किया? जानवी के साथ और उसका हाल पूछने भी नहीं आया, माफ़ी माँगना तो दूर की बात।”

“यह बात जय सर ने किसी को भी बताने से मना किया है। अगर स्ट्रेस में रहेंगी तो इसका असर बच्चों पर पड़ेगा। इसलिए मैं आपको पूरी बात बता देता हूँ। लेकिन जानवी और रेणुका को इसके बारे में कुछ मत कहना।”

“क्यों? ऐसा क्या किया है जयराज ने?”

“अच्छा हुआ कि मैं वहाँ वक्त पर पहुँच गया। जयराज सर पूरी रात अस्पताल में दाखिल थे। उसे कोई नशा दिया गया था, बहुत तेज था। अभी भी वह अस्पताल में है। होश तो उन्हें रात ही आ चुका था।” प्रीति उसके बाद ध्यान से सुनने लगी।

“किसने किया और जानवी को क्यों नहीं बताया?” प्रीति ने कहा।

“जय सर को किसी ने बहुत बड़े जाल में फँसाने की कोशिश की है। जानवी भाभी को जानबूझकर चित्र से ही दूर कर दिया। जय सर चाहते हैं कि सभी को लगे कि वह और जानवी अलग हो गए हैं।”

“मगर यह सब किया किसने है?”

“जयराज सर के बहुत से दुश्मन हैं और कुछ दुश्मन उसके घर में भी हैं। बाहर के दुश्मनों से लड़ना आसान होता है। मगर जो घर में हों उनसे लड़ना बहुत मुश्किल। अगर जानवी सिंघानिया मेंशन जाती तो फिर उसकी जान को भी खतरा हो सकता था। जानवी भाभी की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है कि वह जहाँ पर रहे। टाइम आने दो, जयराज सर जानवी भाभी को खुद मना लेंगे। भाभी के बिना वह कहाँ रह सकते? वैसे उनकी किस्मत अच्छी थी कि भाभी वहाँ पहुँच गई और उसके वजह से मुझे पता चल गया। हो सकता था सर की जान चली जाती।”

“वह इतनी सुरक्षा रखते हैं, तो फिर यह कैसे हुआ?”

“मैं आपको पूरी बात बताता हूँ। मगर याद रहे, जानवी भाभी की भलाई के लिए उन्हें कुछ नहीं बताना है। आपको किसी से भी बात नहीं करनी है। टॉप सीक्रेट है, बहुत ज़्यादा सीक्रेट, समझो। सर और भाभी की जान का मसला है।” प्रदीप मेहता उसे पूरी बात बताता है।

वह सुनकर काफी परेशान होती है।

“अब आप परेशान मत हो। मैंने आपको इसलिए बताया है कि आपको परेशान नहीं होना। सब ठीक हो जाएगा, मैं हूँ ना।” प्रदीप मेहता दूसरे सोफे से उठकर प्रीति के पास आकर बैठ गया क्योंकि प्रीति परेशान थी। उसने प्रीति का हाथ पकड़कर कहा। “आपको सिर्फ़ इस बच्चे के बारे में सोचना है और खुश रहना है। जानवी भाभी को कोई परेशानी नहीं आएगी।”

“कल से कॉलेज जाना शुरू करो। जानवी भाभी को भी साथ ले जाना।” प्रदीप मेहता ने कहा।

“ठीक है।” प्रीति के मन में बहुत गुस्सा था, मगर अब उसे अच्छा लगा।

“आपने नाश्ता कर लिया?”

“जी।” प्रीति ने कहा।

“आपने कुछ खाया है?” प्रीति ने वापस पूछा।

“नहीं, अभी नाश्ता करूँगा।”

“मैं आपके लिए लेकर आती हूँ।”

“नहीं, कोई बात नहीं, मैं ले लूँगा।” मगर प्रीति किचन में चली जाती है। वह उसके लिए नाश्ता लेकर आती है। प्रीति जिसका मन बहुत खराब हो रहा था, मगर अब वह अच्छा महसूस कर रही थी। उसे यह भी अच्छा लगा कि उसने पहली बार पूछा। प्रदीप मेहता ने उसे सारी बात बता दी थी। उसने उस पर भरोसा किया था। उसी की वजह से अच्छा लगा।

“आप कल कॉलेज जाते हुए भाभी को साथ ले जाना।” वह नाश्ता करता हुआ कहने लगा।

“मैं आपसे छोटी हूँ, आप मुझे ‘तुम’ कह सकते हैं।” प्रदीप ने मुस्कुराते हुए उसकी तरफ देखा। वह बहुत थका हुआ आया था। पूरी रात सोया नहीं था। एक औरत के घर होने से घर सचमुच घर लगने लगता है। उसे प्रीति का वहाँ होना और बातें करना अच्छा लग रहा था। उससे बातें करके उसकी सारी थकावट भी उतर गई थी। जब प्रीति ने उससे पूछा तो एक मिनट में उसने प्रीति पर विश्वास करके पूरी सारी बात बता दी थी। शायद उनका रिश्ता था जो उनको जोड़ने वाला था।

अनीक वर्मा जयराज से मिलकर अस्पताल से निकला था। वह लाइट्स के हरे होने का इंतज़ार कर रहा था। उसकी नज़र ऑटो में बैठी हुई रेणुका पर गई। जैसे ही लाइट हरी हुई, अनीक रेणुका के पीछे ही चला गया था। उसने गाड़ी ले जाकर ऑटो के आगे लगा दी।

“कौन है ये? इसने सुबह-सुबह पी रखी है?” जब ऑटो वाले ने एकदम ब्रेक लगाए और रेणुका का सिर ऑटो की अगली सीट से जाकर टकराया तो उसने कहा।

“मालूम नहीं मैडम।” वह बाहर निकालकर देखने लगी। तब तक अनीक गाड़ी से उतर चुका था।

“कहाँ जाना है तुम्हें? चलो मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ।” अनीक ने कहा।

“हमारी बात नहीं हो सकी। प्लीज़ मुझे तुमसे बात करनी है।”

रेणुका का मन नहीं था, पर वह सड़क पर तमाशा नहीं लगाना चाहती थी।

“ठीक है, चलो।” वह जाकर उसके साथ बैठ गई थी।

“क्या कहना है? जल्दी बोलो।” रेणुका ने कहा।

“ऐसा तो मत करो यार। कहाँ मैं फ़ौरन से आया हैंडसम लड़का। सोचा था इंडिया में लड़कियाँ मेरे आगे-पीछे घूमेंगी। मगर यह देखो, तुम्हारे पीछे घूम रहा हूँ और तुम मुझे इतना रूखे से बात कर रही हो।”

“तो मत करो बात मुझसे। गाड़ी रोको, मैं उतर जाती हूँ।”

“बिल्कुल भी नहीं। उतरने की बात मत करो और गालियाँ निकाल लो।” अनीक ने मुस्कुराकर कहा।

“क्या कहना है अब? जल्दी बताओ। फ़ालतू की बातें मत करो।”

“देखो, मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ।”

“मगर मुझे नहीं करनी। मैं घर जाकर बता दूँगी, घरवालों को बता दूँगी।”

“मगर मुझे करनी है। यह दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, क्या करूँ?” अनीक गाना गाने लगा।

“तुम विदेशी आए हो तो इंग्लिश गाने गाओ।” रेणुका ने कहा।

“तो ऐसा करते हैं, जब मेरा शादी का मूड हुआ, मैं बता दूँगी। मगर अभी मुझे नहीं करनी।”

“ऐसा भी क्या हो गया?”

“शादी के बाद क्या होता है, मुझे पता है। जिस लड़की को रात तुम्हारी हेल्प से अस्पताल लेकर गई थी ना, उसकी हालत तो उसके पति की वजह से हुई थी। वह नशे में पड़ा था और किसी और के साथ। हमने उसके कमरे से किसी को निकलते देखा है।”

“अपनी फ़्रेंड को तो तुम ले गई, मगर उसका क्या?”

“क्या मतलब?” रेणुका ने उसकी तरफ़ देखा। “मेरा घर आ चुका है, अब मैं जा रही हूँ।” उसने गाड़ी रोकी और वह उतरकर जाने लगी। अनीक भी गाड़ी से उतरा और उसके साथ आने लगा।


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