अनीक उसे जाता हुआ देखता रहा। वह लड़की उसे सचमुच बहुत अच्छी लग रही थी। अनीक वर्मा एक बिज़नेस फैमिली से संबंध रखता था। उसके परिवार वाले विदेश में बस गए थे। वह भारत आया था और अपने कारोबार को यहाँ बढ़ाना चाहता था। उसने आते ही एक होटल खरीदा था। अब रेणुका की वजह से यहीं बसने का फैसला कर लिया था।
जहाँ जब लड़कियों को पता चलता था कि वह एक अमीर बाप का बेटा है और विदेश से आया हुआ है, तो वे उसके आगे-पीछे घूमती थीं। मगर यह लड़की उससे सीधे बात भी नहीं कर रही थी।
इसकी जो सहेलियाँ हैं, उन्हें तो आप जान ही चुके हैं।
“उनसे दोस्ती करो। आपके बारे में जो उनका ओपिनियन होगा, वही उसका होगा।” ब्रेकफास्ट करते हुए समर ने कहा।
“हाँ, अभी भी वह मुझ पर अपना गुस्सा उतार रही है। असल में जानवी के साथ जो हुआ, उसी की वजह से है।” अनीक ने कहा।
“अगर आप उसे इतना समझ गए हैं, फिर वह आपको पसंद कर सकती है।” रेणुका की भाभी ने कहा। अनीक रेणुका की माँ की सहेली का बेटा था। उसकी माँ को तो शुरू से ही वह बहुत पसंद था। रेणुका के अन्य परिवार वाले भी उसे पसंद करते थे। रेणुका के परिवार का ज्वेलरी का बिज़नेस था और वे अपने इस बिज़नेस में अच्छे खासे कामयाब थे। रेणुका के परिवार की गिनती शहर के अमीर परिवारों में की जाती थी।
उन तीनों सहेलियों ने कॉलेज जाना शुरू कर दिया था। प्रीति सारी सच्चाई जानती थी, वह सब कुछ जानकर भी चुप थी।
“वैसे, जानवी, तुम्हें नहीं लगता प्रीति पहले से ज़्यादा खूबसूरत लगने लगी है?” रेणुका ने प्रीति की तरफ़ देखते हुए कहा। तीनों सहेलियाँ कॉलेज के लॉन में बैठी हुई थीं।
“बिल्कुल, इसके निखरने के दिन हैं।” जानवी ने हँसकर कहा।
“आखिरकार, माँ बनने वाली है।”
“मुझे लगता है इसे उस प्रदीप मेहता से प्यार हो गया है।” रेणुका ने कहा।
“पता है, वह इसकी कितनी केयर करता है। मैंने खुद देखा है।” जानवी ने कहा।
“तुमने प्रदीप मेहता से जय के बारे में नहीं पूछा? उसे तो हर जानकारी होती है।”
“नहीं, मैंने पूछना ज़रूरी नहीं समझा। मैं चाहे रोज़ मिलती हूँ उससे। वह क्या कह सकता है? अब मैं इस टॉपिक पर बात नहीं करना चाहती।” जानवी ने कहा।
“बात न करने से क्या तुम्हारी ज़िंदगी से निकल जाएगा?” रेणुका कहने लगी।
“इतने दिन हो चुके हैं, मुझसे मिलने आना तो दूर, मेरा हाल-चाल भी नहीं पूछा उसने। मुझे उसका इंतज़ार था।” कहते हुए वह उदास हो गई।
“मुझे लगता है अब प्रीति उस प्रदीप मेहता के जाल में फँस रही है।” रेणुका ने कहा।
“क्या हर टाइम तुम गुस्से में रहती हो? हम दोनों हस्बैंड-वाइफ हैं।” प्रीति ने टोका।
“ओ हो! अब तुम्हारे वह हस्बैंड हो गए।”
“देखो, मेरे कहने का मतलब है कि हमारा रिश्ता है। हम दोनों अलग-अलग कमरों में रहते हैं, मगर यह बात सच है, वह मुझे बहुत रेस्पेक्ट देते हैं। इसीलिए उनके बारे में कुछ मत कहो।”
“सुन रही हो जानवी?” रेणुका ने कहा।
वह उन दोनों की बातों पर मुस्कुराने लगी। “मैं खुश हूँ प्रीति तुम्हारे लिए। जलकर ज़िंदगी जीना बहुत मुश्किल है। किसी के दिल का बोझ हल्का होता है तो हो जाए, वरना यह बोझ उठाना आसान नहीं है।”
“क्या यह उदास शायरी क्यों कर रही हो? अब जयराज की याद में ऐसी बेकार बातें मत करो। कोई फ़िल्म देखते हैं आज रात को? बाहर खाना खाने जाते हैं, बहुत टाइम हो गया मस्ती किए हुए।” रेणुका कहने लगी।
“बात तो तुम्हारी सही है। चलें प्रीति।” जानवी ने प्रीति से कहा।
“मुझे जरा इनसे पूछना पड़ेगा।”
“बड़ी आई! मुझे इनसे पूछना पड़ेगा। तो पूछ ले उससे।” रेणुका प्रीति पर गुस्सा हुई।
“मेरी छोड़, तुम्हारे उस अनीक वर्मा का क्या हुआ? मैंने देखा है, आजकल तो वह कॉलेज में भी चक्कर लगा रहा है।” प्रीति उसे छेड़ने लगी।
“वैसे, अच्छा लड़का है।” जानवी ने कहा।
“जयराज भी अच्छा था। प्रदीप मेहता भी अच्छा है। बुरी तो हम तीनों लड़कियाँ ही हैं।”
रेणुका हर बात पर जयराज को बीच में क्यों ले आती हो? जानवी ने कहा।
“बिल्कुल सही बात है। अब हर बात पर जयराज की गलती थोड़ी हो सकती है।” प्रीति ने जानवी की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा।
“अच्छा, तो फिर प्रदीप मेहता की गलती होगी।” रेणुका कहने लगी।
“क्या तुम दोनों लड़ाई करने लगी हो? तो आज शाम का प्रोग्राम फ़ाइनल है। पहले हम लोग मूवी देखेंगे, फिर डिनर बाहर करेंगे, फिर घर आयेंगे।”
“सही है।” तीनों सहेलियों ने प्रोग्राम बना लिया था। अब एक पीरियड रहता है। “हम लोग घर चलते हैं उसके बाद। शाम को मिलेंगे हम लोग।”
कॉलेज खत्म होने के बाद तीनों अपने-अपने घर चली गई थीं। प्रीति ने प्रदीप मेहता से फ़ोन पर बात करके जाने के बारे में पूछ लिया था। प्रदीप मेहता ने उसे जाने को कह दिया था, मगर साथ में ध्यान रखने को कहा था।
दादाजी ने जानवी को जाने की परमिशन दे दी थी। वे तीनों एक साथ चली गई थीं। तीनों ने हाल के अंदर प्रवेश किया और अपनी जगह देखकर बैठने लगीं।
“बहुत टाइम के बाद कोई रोमांटिक मूवी आई है।” रेणुका ने कहा।
“खुद तो तुम रोमांस से दूर भागती हो। बेचारा वह अनीक तुम्हारे पीछे घूम रहा है। तुम्हें मूवी रोमांटिक देखनी है।”
“आजकल प्रीति ज़्यादा नहीं बोलने लगी।” रेणुका ने प्रीति को टोका।
“तो मैं चुप क्यों रहूँ?” प्रीति ने कहा।
“अगर तुम्हारा बच्चा भी तुम्हारे जैसे बोलेगा, तो बेचारे प्रदीप मेहता का क्या होगा? वह तो पहले ही इतना कम बोलता है।” रेणुका कहने लगी।
“बिल्कुल, वह तो बेचारा इसके आगे केवल सिर हिलाता रहता है।” जानवी प्रीति को छेड़ने लगी।
प्रीति बीच में बैठी थी। वह दोनों साइड पर थी। तीनों एक-दूसरे से मज़ाक करती रहीं और उनके मज़ाक का विषय सबसे ज़्यादा प्रीति थी क्योंकि यह बात सच थी कि प्रीति जो चाहे बोलती थी, प्रदीप मेहता उसकी हर बात मानने लगा था। प्रीति भी खुश रहने लगी थी।
“वैसे, तू कब शिफ्ट हो रही है उसके कमरे में?” रेणुका ने कहा।
“आज हो जाऊँगी।”
“सच में?” रेणुका ने पूछा।
“क्या यार, फ़िल्म देखने दो ना! तुम दोनों कहाँ लड़ाई करने लगी? अगर हो भी जाएगी तो क्या होगा? वह पति है इसका।” जानवी ने कहा।
तभी जानवी की साइड कोई आकर बैठ गया था, जिसके चेहरे पर मास्क लगा हुआ था, जिस पर जानवी का ध्यान नहीं था। वह अपने दोनों सहेलियों से बातें करने में बिजी थी। तीनों फ़िल्म कम देख रही थीं और लड़ाई ज़्यादा कर रही थीं।
उस फ़िल्म में फ़िल्म की हीरोइन पर उसका पति बहुत जुल्म करता था। वह उसे छोड़कर हीरो से शादी कर लेती है। यह देखकर रेणुका के मन में ख्याल आता है।
“जानवी, तुम भी जय से तलाक क्यों नहीं ले लेती?”
“तो उसे क्या होगा?”
“मुझे लगता है अब तुम्हें उससे पीछा छुड़ा लेना चाहिए।”
“छोड़ इन बातों को।” जानवी को तलाक की बात भी अच्छी नहीं लगी थी।








Leave a Reply