sitaron se aage episode 68

कोई और नहीं मिला तुम दोनों को। मुझे ऑफिस का काम करना है। तुम दोनों जाओ जहाँ से आए हो। मालूम नहीं कहाँ से बिना सिर-पैर की बातें लेकर आ जाते हो। युग ने दोनों को ही ऑफिस से बाहर निकाल दिया। “भाई कभी परी से शादी नहीं करेंगे। दादी और दादू का सपना तो बीच में ही रह जाएगा,” यश ने कहा। “क्या तुम्हें कोई लड़की पसंद है?” जूही ने यश से पूछा। “कोई बात नहीं, तुम्हारी शादी कर देते हैं।” “तुमने दरवाजा बंद नहीं किया,” जयराज ने कहा। जानवी बेड पर आकर जयराज के पास बैठ गई थी, मगर दरवाजा थोड़ा सा खुला था। “अभी टाइम क्या हुआ है? तीनों में से कोई ना कोई आ जाएगा। फिर मुझे खोलना पड़ेगा,” जानवी ने कहा। “इतनी दूर क्यों बैठी हो? मेरे पास आ जाओ,” जयराज ने उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींच लिया। “हमारे बच्चे बड़े हो चुके हैं। थोड़ा सोचा करो, कोई आ जाएगा,” जानवी ने कहा। “क्यों? तुम्हें उठाकर लाया हूँ मैं, शादी की है तुमसे, तो मैं तुमसे दूर क्यों रहूँ?” उसने जानवी के चेहरे पर आए बालों को पीछे किया। “हाँ, बस आपको तो हमेशा ऐसी बातें करनी हैं। थोड़ी शर्माना नहीं करो। योग कितना बड़ा हो गया। दोनों छोटे बच्चे भी बड़े हो चुके हैं,” जानवी ने कहा। जयराज खुद बेड से खड़ा हो गया और दरवाजा बंद करने के लिए चला गया। उसे देखकर जानवी मुस्कुराई। “मुझे तो लगता है आपकी आदतें बिगड़ने लगी हैं।” वह आराम से तकिये पर सिर रखकर लेट गई और रिमोट उठाकर टीवी ऑन करने लगी। जयराज ने उसके पास आकर रिमोट पकड़ लिया। “यह टाइम सिर्फ़ और सिर्फ़ मेरा है। कोई टीवी नहीं, कोई बच्चे नहीं।” वह उसके साथ आ गया था। “मेरा सारा टाइम ही तो आपका है। आप ही तो मेरी दुनिया हैं।” वह उसके साथ लेट चुका था। जानवी उसके सीने से लग गई। “बिल्कुल गलत,” जयराज ने अपनी बाहों में कसते हुए उसे कहा। “वह जो तीन शैतान हैं, जब से वह पैदा हुए हैं, मुझे कहाँ टाइम देती हो?” जय ने अपने हाथ से उसके बालों को सहलाया। “सुनो, कहीं छुट्टियों पर चलते हैं। ज़्यादा नहीं तो एक हफ़्ते के लिए।” “हाँ, सही बात है। इसी वीकेंड पर चलते हैं, तीनों बच्चे भी फ्री होंगे।” “यार, फिर बच्चे, तुम्हारे बच्चे नहीं। हम दोनों चलते हैं अपने सेकंड हनीमून पर। जहाँ पर तुम और मैं किसी खूबसूरत सी जगह का प्रोग्राम बनाते हैं।” “आपका हर साल सेकंड हनीमून होता है। फिर आप मुझे कितना तंग करते हैं वहाँ। इस बार नहीं जाऊँगी मैं आपके साथ अकेले।” “तो और किसी को तंग करूँगा? अगर तुम्हें नहीं करूँगा तो। वैसे भी मुझे इतनी आदत पड़ चुकी है, क्या करूँ?” वह उसके होठों पर झुकने लगा। जानवी ने अपनी आँखें बंद कर लीं। जयराज ने जानवी की टी-शर्ट उसके पेट से हटाकर उसके पेट पर हाथ रख लिया था। बहुत धीरे से, सॉफ्टली, वह जानवी के होठों को किस कर रहा था। जैसे ही जयराज ने अपने होंठ जानवी के होठों से अलग किए, “आपकी दाढ़ी चुभती है,” वह अपनी गाल सहलाने लगी। “25 साल हो चुके हैं तुम्हारी शिकायत को। ना तो मुझे दाढ़ी कटवाने देती हो। कहा तो है मैंने तुम्हें, क्लीन शेव हो जाता हूँ और कहती हो तुम्हें दाढ़ी पसंद है। फिर साथ ही इसकी शिकायत भी करती हो,” जयराज ने जानवी की गर्दन में चेहरा छुपाते हुए कहा। “यह बात तो सच है कि आप मुझे ऐसे ही अच्छे लगते हैं। क्लीन शेव होने के बाद अगर ज़्यादा हैंडसम हो गए तो, लड़कियाँ तो अभी भी आप पर इतना मरती हैं। फिर तो काम और खतरनाक हो जाएगा। कितनी मुश्किल से मैंने इतने सालों से अपने पति को बचा-बचाकर रखा है,” जानवी ने मुस्कुराकर कहा। जानवी ने अपने हाथ जयराज की पीठ पर कस दिए थे। “थोड़ी एक्सरसाइज़ कम किया करो।” उसे दिन में युग कह रहा था कि एक लड़की पूछती है कि “जयराज तुम्हारे बड़े भाई हैं क्या? और दाढ़ी भी सफ़ेद रखा करो। आपको देखकर लगना चाहिए तीन बच्चों के पिता हैं आप।” “तो क्या सफ़ेद दाढ़ी में मैं तुम्हें अच्छा लगूँगा?” “मुझे तो आप हर तरह से अच्छे लगते हैं,” जानवी ने कहा। जयराज जानवी के कंधे से टीशर्ट हटाकर उसके कंधे पर प्यार करने लगा था। इस उम्र में भी वह इतना फिट था। सुबह एक्सरसाइज़ करना उसका रूटीन था और अब तो वह ड्रिंक वगैरह सब कुछ छोड़ चुका था। वह ज़िन्दगी में बहुत खुश था। उन दोनों का प्यार टाइम के साथ और भी बढ़ गया था। जानवी उसकी ज़िन्दगी थी, जिसके बिना वह नहीं जी सकता था। जानवी ने उसे इतना बड़ा परिवार दिया था। अकेले रहने वाला जयराज अब कभी अकेला नहीं रहता था। उसके तीनों बच्चों में से कोई न कोई उसके पास होता। तभी दरवाजे पर आवाज़ हुई। “कोई है,” जानवी ने जयराज को रोकते हुए कहा। “आए होंगे मेरे रोमांस के दुश्मन, इन्हें कोई चैन नहीं है।” जय जानवी से अलग हुआ। जानवी अपने कपड़े ठीक करती हुई बेड से उठी। उसने दरवाजा खोला। जूही और यश दोनों ही थे। “आप लोग इतनी जल्दी सो गए?” जूही ने टाइम देखते हुए कहा। वे कमरे के अंदर आए। जूही बेड के ऊपर जयराज के साथ जाकर बैठ गई। यश भी वहाँ सोफे पर बैठ गया। जानवी भी उसी के पास सोफे पर बैठ गई। “तुम दोनों कहाँ घूम रहे हो? सोना नहीं है क्या?” जयराज ने उन दोनों से कहा। “हम तो भाई के पास गए थे, मगर कोई फ़ायदा नहीं हुआ।” “क्यों?” जानवी ने यश से पूछा। “हमने कहा कि दादा और दादी चाहते हैं कि आपकी और परी दीदी की शादी हो जाए, मगर उसने साफ़-साफ़ मना कर दिया।” “यह काम तुम्हारी मॉम करेगी। तुम्हारी मॉम की बात वो नहीं टालता। वो और किसी की नहीं सुनेगा,” जय ने कहा। “मैं आ जाऊँ?” तभी खुले हुए दरवाजे से युग ने कहा। “अगर मैं नहीं कहूँगा तो क्या नहीं आओगे?” जय ने उसे जवाब दिया। “यह कौन सा तरीका है जय, बच्चों से बात करने का? आओ मेरे बेटे,” जानवी ने उससे कहा। वह जानवी की दूसरी साइड आकर बैठ गया था।


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