सितारों से आगे एपिसोड 78

जयराज कमरे से दरवाजा खोलकर जाने लगा था, किन्तु वह वापस आ गया। उसने माया को ऊपर से नीचे तक देखा।”तो चलो मेरे साथ, मेरे फार्म हाउस पर चलते हैं,” जयराज ने मुस्कुराकर कहा, “जो शहर से बाहर है। और हाँ, तुम मेरे साथ रात गुजारने का कोई पछतावा नहीं करोगी।””चलिए,” माया खुश हो गई थी। जो वह चाहती थी, वह होने लगा था। इतनी आसानी से जय उसके पास आ जाएगा, यह बात उसने सोचा भी नहीं था। वह तो बस एक कोशिश कर रही थी, जो कामयाब रही।”दो मिनट रुको जय, मैं फ्रेश होकर आती हूँ।”माया बाथरूम में चली गई।जयराज ने उसके जाने के बाद अपना फ़ोन निकाला और किसी को मैसेज किया।”हम आ रहे हैं।”और अपना फ़ोन बंद करके वापस पॉकेट में डाल दिया।माया बाथरूम में गई और उसने अपने पिता को फ़ोन मिलाया।”जल्दी ही आपकी बेटी माया जयराज सिंघानिया बन जाएगी।””क्या कह रही हो तुम?””बिल्कुल सच कह रही हूँ। मुझे समझ में नहीं आ रहा। आप कहते थे कि वह बड़ा चालाक आदमी है, मगर एक खूबसूरत लड़की पर अपना दिल हारने को तैयार है।””यह तो बहुत अच्छी खबर है,” कुंदन ने कहा।फ़ोन काटने के बाद माया ने अपना मेकअप ठीक किया और बाहर आ गई।जयराज अपनी पॉकेट में हाथ डालकर शीशे में बाहर देख रहा था।”चले,” माया ने उसे कहा।वह दोनों जाने लगे। जयराज के साथ ड्राइवर था, इसलिए जयराज गाड़ी में आगे बैठ गया और माया पीछे।”कहाँ चलना है सर?” ड्राइवर ने पूछा।”हमारे फार्म हाउस ले चलो,” जयराज सिंघानिया ने कहा।माया की खुशी उसके चेहरे से नज़र आ रही थी।”तुम कम्फ़र्टेबल तो हो?” जयराज ने पीछे की तरफ़ देखते हुए माया से कहा।”बिल्कुल, मैं बहुत कम्फ़र्टेबल हूँ और बहुत खुश हूँ।”जैसे ही वे लोग शहर से बाहर निकले, एक गाड़ी उनका पीछा करती हुई दिखाई दी।”मुझे ऐसा लगता है कि हमारा पीछा हो रहा है। यह गाड़ी शहर में भी हमारे पीछे थी,” माया कहने लगी।”पत्रकार होंगे और कौन होगा?” जयराज ने कहा।”अगर उन्होंने हमारी एक साथ तस्वीरें खींच लीं, तो हम दोनों मीडिया में आ जाएँगे। तो क्या करें अब?””आते हैं तो आने दो,” जयराज सिंघानिया ने लापरवाही से कहा।”मगर आपकी फैमिली है। आपको इस बात के लिए सवाल करेगी। मैंने इसलिए कहा।””मैं जो करता हूँ, सरेआम करता हूँ। छुपाकर कुछ नहीं करता। अगर मैं कोई काम कर रहा हूँ, तो उसका जवाब मैं देने के लिए तैयार हूँ। तुम क्यों फ़िक्र करती हो, डार्लिंग? अगर तुम मेरे साथ मीडिया में नहीं आना चाहती तो बताओ।””नहीं नहीं, मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मगर मुझे डर है कि आपकी पत्नी और बच्चे प्रॉब्लम क्रिएट कर सकते हैं।””तुम उनका फ़िक्र मत करो, उनके साथ कैसे डील करना है, मुझे पता है।”थोड़ी सी देर में वे फार्म हाउस पहुँच चुके थे। जैसे ही गाड़ी से उतरे, जयराज ने माया का हाथ पकड़ लिया।”चलो ब्यूटीफुल,” जयराज सिंघानिया ने कहा।दोनों फार्म हाउस के अंदर गए।”आपका फार्म हाउस बहुत खूबसूरत है,” माया ने देखते हुए कहा।”मगर ब्यूटीफुल तुमसे ज़्यादा नहीं,” जय की बात पर माया मुस्कुराई।”सारी तैयारी हो गई है,” उनके सामने एक आदमी आया, जयराज ने उसे कहा।”जी सर, आपका कमरा तैयार है।””ठीक है, रात के लिए डिनर रेडी हो रहा है ना? हम लोग कई दिन यहाँ रहेंगे,” जयराज ने कहा।”कई दिन?” माया ने उसकी तरफ़ देखते हुए पूछा।”क्यों? तुम्हें मेरी कंपनी अच्छी नहीं लगेगी? अगर मैं तुम्हें खुश कर दिया, फिर तो रुकोगी ना मेरे साथ?”जय उसकी कमर में हाथ डालकर अपने नज़दीक कर लिया था।”मैं तो कहती हूँ हमेशा के लिए मुझे जहाँ रख लीजिए।””तुम्हारी यह इच्छा भी पूरी कर दूँगा,” वह मुस्कुराकर बोला।जो हो रहा था, इतना तो माया ने सोचा भी नहीं था। वह तो सिर्फ़ जयराज के साथ दोस्ती करना चाहती थी, मगर वह तो उसका पूरा दीवाना हो रहा था और उसे क्या चाहिए था। वह दोनों सीढ़ियों से ऊपर जाने लगे।”क्या सोच रही हो, इतनी चुप क्यों हो तुम?” जयराज जो उसके साथ था, उसने पूछा।”आपका साथ अगर सपना है, तो मैं पूरी ज़िन्दगी इस सपने में रहना चाहती हूँ।”जयराज ने माया का चेहरा अपने हाथ में लिया। “सिर्फ़ इतनी सी ख्वाहिश है…” जिस पर जयराज का दिल आता है, उसकी कोई ख्वाहिश दिल में नहीं रहती। उसने अपनी उंगली उसके होठों पर लगाई, फिर बाद में अपने होठों पर लगा ली।”फिर उंगली क्या लगा रखे हो? इन होठों को तो आपके होठों की प्यास है,” माया ने कहा।”बिल्कुल, मेरी प्यास भी तुम्हारे होठों से बुझेगी,” कहते हुए जयराज ने माया को अपनी बाहों में उठा लिया।”ध्यान से, मैं इतनी हल्की नहीं हूँ,” माया ने कहा।”ऐसा क्यों? नहीं कहती, तुम्हें लगता है कि एक 55 साल का आदमी बूढ़ा हो गया है और वह फूल जैसी नाज़ुक लड़की को नहीं उठा सकता?”माया ने जयराज के गले में अपनी बाहें डाल दी थीं और वह उसे उठाता हुआ कमरे में ले गया।”सचमुच आप तो बड़े रोमांटिक हैं, मुझे नहीं पता था। मुझे तो लगता था इतनी बड़ी इंडस्ट्री का मालिक रुखा-सूखा होगा, जिसे हर टाइम बिज़नेस मीटिंग यही सब आता होगा। मुझे नहीं पता था वह ऐसा है।””तुम मेरे बारे में अभी जानती ही कितना हो? लोग कहते हैं, मेरे मन में क्या है, कोई अंदाज़ा नहीं लगा सकता। सिर्फ़ मेरी पत्नी मेरा चेहरा देखकर बता देती है कि मैं क्या सोच रहा हूँ।”उसकी पत्नी का नाम आते ही माया का मूड खराब हो गया।


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जयराज कमरे से दरवाजा खोलकर जाने लगा था, किन्तु वह वापस आ गया। उसने माया को ऊपर से नीचे तक देखा।”तो चलो मेरे साथ, मेरे फार्म हाउस पर चलते हैं,” जयराज ने मुस्कुराकर कहा, “जो शहर से बाहर है। और हाँ, तुम मेरे साथ रात गुजारने का कोई पछतावा नहीं करोगी।””चलिए,” माया खुश हो गई…

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