सितारों से आगे एपिसोड 94

परी तुम प्रदीप मेहता की नहीं, उनके छोटे भाई वरुण मेहता की बेटी हो।”युग ने कहा।””मॉम डैड दोनों ही मेरे मॉम डैड नहीं हैं। उनके भाई वरुण की बेटी हूँ मैं। मैंने फोटो देखी है चाचू की, मगर उनकी वाइफ की तो तस्वीर नहीं है। ना ही किसी ने बात की। सभी चाचू की बात करते हैं।” परी ने परेशान होकर कहा।परी यह बात सोच भी नहीं सकती थी कि प्रति उसकी मॉम है, मगर प्रदीप मेहता उसके डैड नहीं। वह कोई और ही बातें सोच रही थी।अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला।”कौन है?” माया उठकर दरवाज़े के पास आई।”प्लीज मुझे जाने दो। तुम्हें जो चाहिए होगा सब मिल जाएगा। मुझे मेरे डैड से बात करने दो। वह तुम्हें बहुत से पैसे देंगे।” माया उसके पैर पकड़ने लगी।”मैं हूँ माया।” जयराज ने कहा।दरवाज़े के खुलने से कमरे में रोशनी बढ़ गई थी। उसने जयराज की तरफ देखा। उसके माथे पर चोट का निशान था। उसकी दाढ़ी नीचे से सफ़ेद निकलने लगी थी। उसके कपड़े जगह-जगह से फटे हुए थे और उसके बाजू पर भी पट्टी बंधी हुई थी।”तुम?” माया ने पूछा।”तुम दोनों को जो नाटक करना हो, जहाँ से दूर जाकर करना। जल्दी चलो, कोई आ जाएगा। तुम लोगों के साथ-साथ मेरी भी जान जाएगी।” पीछे से एक आदमी ने कहा।”माया, चलो। हम बाहर जाकर बात करेंगे।” जयराज ने उस आदमी की तरफ देखा।”ये हमारी हेल्प कर रहा है। इसी की वजह से मैं उनकी कैद से निकला हूँ।” जयराज माया को बता रहा था।”याद है ना तुम्हें मैं तुम्हारी हेल्प क्यों कर रहा हूँ? इसके बदले में तुम मुझे पैसे देने वाले हो।” उस आदमी ने कहा।”बिलकुल दूँगा। हमें जहाँ से निकलने में हमारी हेल्प तो करो। हमें जहाँ से सेफली बाहर निकलना है।”वह लोग बिल्डिंग से बाहर निकले।”सामने जो गाड़ी खड़ी है, उसे ले जाओ। यह इसकी चाबी है। तुम लोग जहाँ से निकल जाओ। याद रखना, अगर पैसे मेरे अकाउंट में नहीं पहुँचे तो मैं क्या कर सकता हूँ?” उस आदमी ने धमकाते हुए कहा।”फ़िक्र मत करो, तुम्हारे अकाउंट में पैसे आ जाएँगे।” वह दोनों गाड़ी में आकर बैठ चुके थे। जयराज ने गाड़ी स्टार्ट की और वह उस एरिया से दूर जाने लगे।”तुम फ़िक्र मत करो माया। मैं हूँ ना, हम लोग इस देश से ही बाहर निकल जाएँगे। यह युग ने किया है। अब वह सीईओ बन चुका है। सिंघानिया इंडस्ट्री उसकी मुट्ठी में है। वह और जानवी मेरा पीछा नहीं छोड़ेंगे। तुम्हारी वजह से जान भी अब मेरे खिलाफ़ हो गई है। मेरे पास इतना है कि हम लोग आराम से ज़िंदगी जी सकेंगे। कहीं भी रह लेंगे, जब तुम मेरे साथ हो।” जयराज ने अपना हाथ उसके हाथ पर रखा।माया अब तक जो चुपचाप बैठी थी, उसने गुस्से से जयराज की तरफ देखा।”मुझे नहीं जाना तुम्हारे साथ। मुझे कहीं भी उतार दो, जहाँ से मैं अपने घरवालों को फ़ोन कर सकूँ। दिमाग खराब हो गया था मेरा, जो मैंने तुम्हारे साथ रिश्ता बनाने की कोशिश की। मुझे समझ क्यों नहीं आया कि एक बुढ़े के पास क्या हो सकता है? तुम एक हारे हुए इंसान हो। तुम्हारे पास कुछ नहीं है, ना पैसा ना जवानी।””तुम यह क्या कह रही हो? तुम्हारे लिए मैंने इंडस्ट्री छोड़ी, अपनी फैमिली को छोड़ा। मैंने अपने बेटे से दुश्मनी ली, अपनी वाइफ़ को अपने खिलाफ़ कर लिया और तुम मुझे क्या कह रही हो?” जयराज ने साइड पर गाड़ी रोक दी।”मैं सच कह रही हूँ, मेरे डैड सोचते हैं कि तुम्हें बर्बाद करना है, मगर क्या है तुम्हारे पास बर्बाद करने के लिए? तुम तो बर्बाद हो गए।” कहते हुए वह हँसने लगी। “वह कहते हैं कि जयराज बहुत चालाक आदमी है, मगर मैं कहती हूँ तुम सबसे बड़े बेवकूफ़ हो। जानवी ने भी सही डिसीज़न लिया।” माया बहुत गुस्से में थी। “जब पहले डैड ने तुम्हें बर्बाद करने की कोशिश की थी, तब तुम पॉवरफुल हो सकते थे और इंटरेस्टिंग भी। मरती होंगी लड़कियाँ तुम पर। मगर अब तुम एक हारे हुए बुढ़े हो। चेहरा देखा है तुम कैसे हो गए हो। मेरे डैड ने युग का इंतज़ाम भी कर रखा है। तुम तो बर्बाद हो गए हो, तुम्हारा बदला मेरे डैड ले लेंगे। वह प्रदीप मेहता की बेटी परिणीता, सभी के पीछे मेरे डैड के आदमी हैं। मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा कि मेरे डैड मुझ पर कैसे नहीं पहुँच सके। अब तक तो डैड को मुझे ढूँढ लेना चाहिए था।”वह गाड़ी से उतर चुकी थी।”मैं किसी से लिफ़्ट माँग लूँगी। तुम्हारे साथ नहीं जाऊँगी।””पक्का मेरे साथ नहीं जाना है?” जयराज ने उसे आराम से कहा।”मैं तुम जैसे लोगों के साथ नहीं जाती। तुम्हारी इतनी औक़ात नहीं है।” माया ने उसे बोला।”ठीक है, जैसे तुम्हारी मर्ज़ी।” कहकर जयराज ने गाड़ी स्टार्ट की और वहाँ से चला गया। माया उसे जाते हुए देखती रही। थोड़ी दूर जाकर जयराज ने गाड़ी बैक की और माया के पास आया।”तुम्हें जहाँ से जाने के लिए अपने डैड को फ़ोन करना होगा। तुम्हारे पास तो फ़ोन ही नहीं है।” जयराज ने गाड़ी के डैशबोर्ड से माया का फ़ोन निकाला और उसे दे दिया।”अपने डैड को फ़ोन करके जहाँ बुलाओ।” कहते हुए वह वहाँ से चला गया।यह माया का फ़ोन था। माया ने अपने फ़ोन को ध्यान से देखा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसका फ़ोन जयराज के पास था। वह अपना फ़ोन ऑन करने लगी, तो फ़ोन ऑन हो गया। फ़ोन फ़ुल चार्ज था।


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