sitaron se aage episode 98

जय ने कहा, “चलो।” और जानवी को वहाँ से ले जाने लगा। फिर उसने माइक पकड़ा।”आप लोग एंजॉय करिए,” जय ने कहा। “अब हमें जाना है। अब मैं अपनी वाइफ के साथ थोड़ा समय बिताना चाहता हूँ। आज का दिन यादगार बनाना चाहता हूँ।””यह आप क्या कह रहे हैं?” जानवी ने कहा। “हम कहाँ जाने वाले हैं?” वह परेशान हो गई।”मेरी बीवी भूल जाती है कि उस पर थोड़ा सा हक मेरा भी है,” जयराज ने कहा, “केवल इसके बच्चों का नहीं। नहीं, थोड़ा नहीं, बहुत ज्यादा। मैं इस की लाइफ में पहले आया। बच्चे बाद में।””1 मिनट, मुझे भी कुछ कहना है,” युग ने बीच में आकर माइक पकड़ लिया।माया का पूरा ध्यान जयराज और जानवी पर था। जयराज उसे अपना हक जता रहा था और जानवी मुस्कुरा रही थी। उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था। वह बहुत खुश थी। वह जय पर झूठा गुस्सा कर रही थी। माया को बहुत जलन हो रही थी।”कहीं वह मेरा इम्तिहान तो नहीं ले रहा था?” माया का दिमाग अब खुलने लगा था। उसे जानवी और जयराज इस तरह से साथ होना बहुत गुस्सा दिला रहा था।”कोई बात नहीं जयराज,” माया बोली, “तुमने मेरे साथ एक रात तो बिताई है। उसके बारे में जब मैं तुम्हारी बीवी को बताऊंगी, तब फिर देखना।” वह अपना फोन देखने लगी। उसके फोन में उसके कमरे की वीडियो थी, जिसमें माया और जयराज के कपड़े फर्श पर पड़े थे। जानवी के लिए तो इतना बहुत होगा। माया ने सोच लिया था कि वह जयराज और जानवी के बीच लड़ाई करवाएगी।”मॉम की लाइफ में हम दोनों साथ आए थे,” युग ने कहा। “उसी दिन तो पहले मॉम से मैं मिला था। आप उसके बाद। डैड तो कमरे के अंदर चले गए थे। मैं मॉम के पास गया था और मॉम का हाथ पकड़ कर मैं ही आपके पास लेकर आया था।” युग शादी वाले दिन की बात कर रहा था, जहाँ जयराज ऑफिस के अंदर चला गया था तो जानवी और युग दोनों साथ में कमरे के अंदर गए। “इसीलिए यह कहना कि मॉम पर आपका हक ज्यादा है, बिल्कुल गलत नहीं है।””हम दोनों भी हैं,” यश ने युग के हाथ से माइक पकड़ लिया। “हमारा हक कहाँ है? हम छोटे हैं तो कोई हमारा हक नहीं? हमसे कोई हमारा हक नहीं छीन सकता।” तीनों बच्चे ही जानवी के साथ लग गए थे।तभी राजन आया और उसने यश के हाथ से माइक ले लिया।”जानवी को जय के लिए किसने चुना था? किसकी पसंद थी जानवी? इसलिए वो मेरी बेटी पहले है। आप सब बाद में। यह मेरी और जया की बेटी है।” जय और राजन ने जानवी को अपने साथ गले लगा लिया था। जानवी की आँखों में आँसू आ गए थे।उसने भी माइक पकड़ लिया। “मैं एकदम खाली हाथ थी। मेरे हाथ में कुछ भी नहीं था, सिवाय एक बूढ़े दादा के शो के, जिससे मेरी बहुत फिक्र रहती थी। मगर किस्मत ने क्या कुछ दे दिया! मुझे इस बात पर गर्व है कि मैं जयराज की वाइफ हूँ। इसलिए नहीं कि उनके पास बहुत पैसा है। बल्कि इस पर मुझे इतना प्यार, रिस्पेक्ट मिली है कि मैंने जिंदगी में कभी सोचा भी नहीं था। मुझे एक माँ का सम्मान पहले युग ने दिया और मेरी पूरी फैमिली बन गई।””बाते बहुत हो चुकी हैं। अब मैं और जानवी जा रहे हैं। आप सब लोग पार्टी एन्जॉय करिए।”जयराज ने जानवी का हाथ पकड़ा और उसे बाहर की तरफ ले जाने लगा।”मॉम जाइए, हम खुश हैं कि आप दोनों साथ हो। हम भी आप एन्जॉय करेंगे।” तीनों बच्चों ने जय और जानवी को वहाँ से भेज दिया था।जैसे ही वह दोनों हाल से निकले, जानवी ने जय के हाथ से अपना हाथ छुड़ा लिया।”थोड़ी तो शर्म किया कीजिए! जवान बच्चों के माँ-बाप हैं। यूँ सबके सामने आपका कहना कि आपको अपनी वाइफ के साथ अकेले टाइम स्पेंड करना है, ज़रूरी था क्या?””क्यों? जब शादी की है तो चोरी क्यों? मैं आज कोई पार्टी देने वाला नहीं था। तुम बच्चों ने गलत किया। वरना हम अब तक तो वहाँ से निकल गए होते।”तभी उनके पीछे भागता हुआ अनीक आया।”मेरी बात तो सुनिए सर!” अनीक ने पीछे से कहा।जयराज और जानवी रुक गए।”क्या हुआ? और तुम यहाँ पर क्या कर रहे हो? पार्टी एन्जॉय करो।” जय ने कहा।”एक्चुअली क्या है कि मुझे और इनकी सहेली के लिए गिफ्ट खरीदना था, तो जानवी की हेल्प चाहिए थी।” उसकी बात पर जानवी खिल-खिलाकर हँसने लगी।”उस दिन तो तुम मेरी मार से बच गए थे, मगर आज नहीं बचोगे।””मैं तो सिर्फ यह बता रहा था कि आपने जो मालदीप में बुकिंग की थी, वह हो चुकी है, आपका सारा प्रबंध हो चुका है। आप अपनी वाइफ के साथ एन्जॉय कीजिए।” कहते हुए वह वापस चला गया। वह साथ में हँस रहा था।सालों पहले और आज के जयराज में कोई फर्क नहीं था। जानवी की दीवानी वैसे ही थी। वह हँसता हुआ वापस पार्टी में चला गया।”क्या हुआ?” प्रदीप मेहता ने उसे कहा।”मार खाने गए थे।””बिल्कुल उस दिन की तरह।” वह दोनों साथ में खड़े हँस रहे थे।”मुझे यहाँ पर नहीं रहना।” माया ने गुस्से से कहा और अपने पिता के साथ बाहर जाने लगी।”यह सब क्या है?” कुंदन श्रीवास्तव ने पूछा।”मुझे नहीं पता।” माया ने कहा। वह दोनों वहाँ से चले गए।राजन और जया अपने दूसरे बेटों, समर और ऋषव के पास खड़े थे।”तुम दोनों आज यहाँ आए, जयराज को अच्छा लगा। वह बड़ा भाई है तुम्हारा। तुम तीनों प्यार से रहोगे तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगेगा।” राजन उन दोनों से कह रहा था।राजन जानता था कि रेखा ने सब काम खराब किया है। उसके बेटे ऐसे नहीं थे।”अच्छा छोड़ो।”


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जय ने कहा, “चलो।” और जानवी को वहाँ से ले जाने लगा। फिर उसने माइक पकड़ा।”आप लोग एंजॉय करिए,” जय ने कहा। “अब हमें जाना है। अब मैं अपनी वाइफ के साथ थोड़ा समय बिताना चाहता हूँ। आज का दिन यादगार बनाना चाहता हूँ।””यह आप क्या कह रहे हैं?” जानवी ने कहा। “हम कहाँ जाने…

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