sitaron se aage episode 112

“तो अब तक वो देव… वो तुम्हारे ऑफिस में क्या कर रहा है?” राजन ने चौंककर पूछा।”उसे जानबूझकर ऑफिस में रखा गया था, डैड। अभी तक उसने कोई सीधी गलती नहीं की थी, इसलिए उसे पकड़ा नहीं जा सका था। हम यही चाहते थे कि अगर वो कोई संदिग्ध गतिविधि करे, तो हमें तुरंत पता चल सके।””महक…” जानवी के चेहरे पर अचानक चिंता उभर आई। “उसे तो हम भूल ही गए थे।””सही कहा आपने,” युग ने गंभीरता से कहा। “हमारी सारी नज़रें सामने वालों पर थीं, लेकिन पीछे से क्या हो रहा था, इस पर किसी का ध्यान नहीं गया था।””आप ये सब क्या कह रहे हैं?” यश अब भी असमंजस में था।”दो मिनट रुको, बेटा,” राजन सिंघानिया ने यश के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा। “अभी फाइल आ जाएगी, सब कुछ तुम्हारे सामने साफ हो जाएगा।”यश परेशान-सा एक कोने में बैठा था। उसकी फैमिली तो एकदम से खुश हो गई थी जब उसने कहा था कि उसे कोई लड़की पसंद है, लेकिन जब कुंदन श्रीवास्तव और माया श्रीवास्तव का नाम सामने आया, तो माहौल ही बदल गया था। यश को इन दोनों के बारे में सब कुछ पता था—उनका इतिहास, उनके पुराने मामले—सबकुछ। लेकिन जो इस वक्त सामने आ रहा था, उसमें महक और उसके पापा का क्या रोल था, ये बात वो खुद भी समझ नहीं पा रहा था।उसे सवाल करने की बजाय शांत रहना ज्यादा ठीक लगा। उसमें अपनी मॉम जानवी के स्वभाव का असर था। वो भी किसी बात पर जल्दी प्रतिक्रिया नहीं देती थीं—सोच-समझकर ही कोई फैसला लेती थीं। यश भी वैसे ही था। उसने चुपचाप बैठकर इंतज़ार करने का फ़ैसला किया था।थोड़ी ही देर में प्रदीप मेहता खुद एक फ़ाइल लेकर आ गया।”आई, भाई साहब,” जानवी उन्हें देखकर तुरंत खड़ी हो गई थीं। प्रदीप सिर्फ़ जय राज का असिस्टेंट नहीं था, बल्कि फैमिली जैसा ही हिस्सा था।”कोई प्रॉब्लम है?” प्रदीप ने अचकचाते हुए पूछा।”हमें तुम्हारे उस क्लर्क देव और उसकी बेटी महक के बारे में डिस्कस करना है,” जय राज ने गंभीर लहजे में कहा। “बोलो, इस केस में वो किस हद तक इन्वॉल्वड थे?” जय राज सिंघानिया ने जब प्रदीप मेहता से सीधी नज़रें मिलाकर कहा—”हमें तुम्हारे उस क्लर्क देव और उसकी बेटी महक के बारे में डिस्कस करना है,”तो पूरे माहौल में एक अजीब-सी चुप्पी भर गई थी।यश की साँसें धीमी हो गई थीं। उसका दिल अचानक जैसे किसी अनकहे डर से भर गया था।प्रदीप ने फाइल खोली और एक-एक कागज़ ध्यान से पलटने लगा था।”ये देखिए, सर,” उसने एक पन्ना आगे बढ़ाया। “महक और देव का नाम साफ तौर पर यहाँ लिंक हुआ है… पहले हमें शक था, लेकिन अब हमारे पास प्रूफ़ हैं कि ये दोनों व्यक्ति कुंदन श्रीवास्तव से जुड़े हुए थे। इनका काम था इंफॉर्मेशन लीक करना—बहुत चालाकी से।”जानवी ने धीरे से अपने चेहरे पर हाथ रख लिया था। राजन ने गहरी साँस ली थी। युग चुपचाप अपनी मुट्ठियाँ भींचे खड़ा था।और वहीं एक कोने में, सोफे के सिरे पर बैठा था यश। उसकी आंखें उस कागज़ पर टिक गई थीं, जैसे उसमें कुछ ऐसा लिखा हो जो उसकी रूह को तोड़ दे।महक… वही लड़की, जिसकी बात आते ही उसकी आँखों में एक अलग-सी चमक आ जाती थी। वही, जिसे देखकर उसे ज़िंदगी थोड़ी आसान लगने लगती थी। और अब… वही नाम उस फाइल में दर्ज था, जिसने उसके विश्वास को तोड़ दिया था।कमरे में जैसे कुछ पल के लिए समय ठहर गया था।यश अपने कमरे में बिना किसी से कुछ कहे चला गया था, मगर उसके पीछे-पीछे उसके पिता जय भी चले आए थे—वैसे ही जैसे एक साया, जो अपने बेटे की तकलीफ़ को बिना कहे समझ लेता है।यश खिड़की के पास खड़ा था, बाँहें सीने पर क्रॉस किए हुए। चेहरा शांत मगर आंखें बेचैन। बाहर की अंधेरी रात को वह ऐसे देख रहा था जैसे खुद को उसमें खो देने की कोशिश कर रहा हो।जय बिना आहट के पास आए थे। धीरे से दरवाज़ा बंद किया था। कुछ पल तक बेटे को बस देखा था। और फिर धीमे कदमों से उसके पास जाकर बगल में खड़े हो गए थे।”इतनी रात को भी चैन नहीं है तुझे?” जय ने बेहद नरम लहज़े में पूछा। आवाज़ में शिकायत नहीं थी, बस एक बाप का सच्चा दर्द था।यश ने सिर घुमा कर देखा, मगर कुछ नहीं कहा। सिर्फ एक हलकी-सी आहट उसके गले में फँसी थी जिसे वह निगल गया था।”तू जानता है न, बेटा, तू किस रास्ते पर जा रहा है?””डैड…” यश का गला भर आया था। मगर वह फिर भी कुछ कह नहीं पाया था।जय ने आगे बढ़कर उसके कंधे पर हाथ रखा। “मैं तेरा बाप हूँ,… और तेरे दिल में जो तूफ़ान चल रहा है, मैं सब पढ़ सकता हूँ। मैं ये भी जानता हूँ कि तुझे महक से प्यार है… बहुत गहरा प्यार। लेकिन बेटा, ये रास्ता सिर्फ तुझे ही नहीं, सबको दुख देगा।”यश की आंखों में एक पल को नमी उभरी थी। “मैं उसे भूला नहीं पा रहा, डैड…” उसकी आवाज़ टूटी हुई थी।”मुझे पता है।” जय ने उसकी पीठ थपथपाई। “मगर हर मोहब्बत मुकम्मल नहीं होती, बेटा। कभी-कभी इंसान को अपनी मोहब्बत को दिल में दफना कर आगे बढ़ना पड़ता है… खुद के लिए, अपने परिवार के लिए।”यश की आंखें अब झुकी हुई थीं। वो अपने दर्द को छुपाने की कोशिश कर रहा था मगर जय से कुछ भी छुपा नहीं था। “और तुझे भी अब अपनी ज़िंदगी को समझदारी से जीना होगा और मैं नहीं चाहता कि मेरा बेटा टूटे।”कुछ देर दोनों खामोश खड़े रहे थे। कमरे में सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।”तू बहुत समझदार है, यश। और मैं जानता हूँ, तू अपने आप को संभाल सकता है। मगर आज अगर मैं कुछ कह रहा हूँ, तो सिर्फ एक बाप की तरह—जो अपने बेटे को टूटते हुए नहीं देख सकता।”यश ने अपनी मुट्ठी भींच ली थी। “मैं कोशिश करूँगा, डैड…” उसने फुसफुसा कर कहा था।जय ने उसके कंधे से हाथ हटाया और उसका चेहरा अपनी ओर घुमा लिया था। “नहीं बेटा… तू सिर्फ कोशिश नहीं करेगा, तू खुद को बचा लेगा। और जब वक्त आएगा, तू उस मोड़ पर खड़ा होगा जहाँ से ज़िंदगी फिर से मुस्कराएगी। मैं तुझ पर भरोसा करता हूँ।”यश ने पहली बार अपने डैड की आंखों में देखा था… और हल्का सा सिर हिलाया था।जय ने एक लंबी सांस ली थी, उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरा और बिना कुछ और कहे कमरे से बाहर निकल गए थे।यश अब भी खिड़की के पास खड़ा था—मगर इस बार उसकी आँखों में सिर्फ उदासी नहीं, थोड़ी सी उम्मीद भी थी… और कहीं गहराई में, अपने डैड की बातों की गर्माहट।


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