जयराज धीरे-धीरे चलकर यश के कमरे से बाहर आया। पीछे मुड़कर एक नज़र अपने बेटे पर डाली, फिर एक गहरी साँस लेकर चला गया। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन एक उम्मीद भी। उसे अब भी यकीन था कि उसका बेटा समझेगा, और जब समझेगा तो सही रास्ता जरूर चुनेगा।जैसे ही जयराज गया, उसी समय दरवाज़ा धीरे से खुला। जानवी हाथ में थाली लिए कमरे में दाखिल हुई। उसकी आँखों में थकावट तो थी, लेकिन चेहरा एक माँ की ममता से भरा हुआ था। उसे यश की फिक्र थी। जानवी को पता था उसका बेटा उसी के जैसा है; मन के अंदर बहुत कुछ रखता है।”मॉम, आप?” यश ने देखा तो एक पल को चौंका, फिर धीरे से मुस्कुरा दिया। क्योंकि अभी उसके डैड उसके पास से गए थे, अभी उसकी मॉम आ गई।”खाना लाई हूँ तुम्हारे लिए।” जानवी ने मुस्कुराते हुए कहा। क्योंकि रात को डिनर करने यश नीचे नहीं आया था।यश धीरे-धीरे उठकर जानवी के पास बैठ गया। माँ की गोद की वो गरमी, वो सुकून उसे कहीं और नहीं मिला था। जानवी ने प्यार से एक बाइट उठाई और उसके मुँह की तरफ बढ़ाई। बिना कुछ कहे यश ने खाना खा लिया।थोड़ी देर दोनों खामोश रहे। यश के मन में जो चल रहा था, जानवी जानती थी। जानवी को यह भी पता था कि वह शेयर नहीं करेगा। मगर वह माँ थी; उसे अपने बेटे को संभालना था। इस वक्त वह अपना जयराज पर गुस्सा भूल चुकी थी। उसे सिर्फ फिक्र थी तो सिर्फ यश की।”बेटा,” जानवी ने धीमे स्वर में कहा,”जो होता है हमारे वश में नहीं होता, उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं होते। कभी-कभी हमें कोई अच्छा लगता है, मगर हम नहीं जानते कि उसके मन में क्या चल रहा है, वो किस प्लानिंग के साथ हमारे करीब आया है… और हम तो बस दिल से उसे देखने लगते हैं, हमें प्यार हो जाता है। मगर हमें सावधान भी रहना चाहिए; हमारा नुकसान भी हो सकता है। इस वक्त तुम्हें जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।”यश ने नीचे देखा। उसके हाथ अब भी थाली पकड़े थे, मगर निगाहें कहीं और थीं। जानवी की आवाज़, उसके शब्द, उसकी छुअन — सब कुछ एक सच्चाई की तरह उस पर असर कर रही थी।”अपनी माँ की बात सुनकर उसे अच्छा लगा,” यश को लग रहा था जैसे उसकी माँ ने उसके दिल की वो बात कह दी हो जिसे वो खुद भी समझ नहीं पाया था।अचानक वो थाली एक तरफ रखकर जानवी के गले लग गया। कुछ पल वैसे ही चुपचाप बीते, दोनों एक-दूसरे की धड़कनें सुनते रहे।थोड़ी देर बाद जानवी ने अपनी आँखें पोंछीं, और मुस्कराकर कहा,”मॉम, मैं समझता हूँ… मैं कमजोर नहीं हूँ।””मुझे पता है बेटा।” जानवी ने सिर हिलाया।”बहुत सी बातें समझ में आ रही हैं… शायद इसलिए उसने कहा था कि घर पर बात बिल्कुल मत करना… वह नहीं चाहती थी कि हमारे प्यार की बात डैड को पता चले। वह जानती थी कि डैड उसकी सच्चाई जानते हैं।”जानवी ने सिर सहलाया। “और तुमने मान लिया, ये बहुत समझदारी की बात थी।”इसी बीच अचानक कमरे का दरवाज़ा खुला। युग और जूही दोनों अंदर आए, और उनके हाथ में तकिए थे।”ऐसे क्या देख रहे हो?” जानवी ने कहा,”हम दोनों आज तुम्हारे कमरे में सोएंगे।””हाँ, और सोने से पहले कोई बढ़िया-सी मूवी देखेंगे।” जूही ने चहकते हुए कहा।यश और जानवी ने एक-दूसरे को देखा, और फिर एक हल्की सी हँसी आई।”मगर क्यों?” यश ने पूछा।”क्योंकि मेरी दोनों भाइयों पर बराबर की हिस्सेदारी है,” जानवी बोली,”कल को जब इनकी शादी हो जाएगी, तो मुझे कोई अपने कमरे में नहीं सोने देगा। इसलिए आज के लिए तो मैं बीच में ही सोऊंगी।”कमरे का माहौल हल्का हो गया। युग ने हँसते हुए तकिया यश के सिर पर फेंका और बोला,”चल, मूड ठीक कर, मूवी लगा।”जानवी ने थाली उठाई, सबको देखा और मुस्कराकर कमरे से बाहर निकल गई।थोड़ी देर बाद, जब मूवी देखने के बाद जूही सो गई, तब यश चुपचाप खिड़की की ओर देखने लगा। उसकी आँखों में अब भी कुछ अनकही बातें थीं। युग पास आ गया।”क्या सोच रहा है?” युग ने पूछा।”महक के बारे में…” यश ने धीमे से कहा।”तुम उसकी सच्चाई जानते हो; तुम्हें जिंदगी में आगे बढ़ना चाहिए।” युग ने उसे समझाया।”तो क्या मैं गलत हूँ?” यश ने पूछा।”नहीं। तू गलत नहीं है। मगर जो तू चाहता था, शायद वो सिर्फ तू ही चाहता था। और किसी का साथ चाहिए होता है रिश्तों में। अकेले चाहने से कुछ नहीं होता।”यश ने आँखें बंद कीं। “मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मैं हार गया?””क्योंकि तूने सच्चा चाहा था। और जब कोई सच्चा चाहता है, तो उसे हार की चुभन बहुत गहरी लगती है। मगर भाई… यही ज़िंदगी है। हम सबको कभी ना कभी अपना हिस्सा छोड़ना पड़ता है ताकि किसी और की कहानी पूरी हो सके।”यश ने युग की तरफ देखा। उसकी आँखों में पहली बार सुकून-सा था।”शुक्रिया, भाई।”दोनों हँस पड़े। कमरे की हल्की रोशनी में यश की आँखें बंद होने लगीं। शायद पहली बार वो थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन खुद से थोड़ा सुलझा महसूस कर रहा था।सूरज की हल्की किरणें बड़ी-बड़ी खिड़कियों से छनकर अंदर आ रही थीं।जानवी किचन से निकलकर डाइनिंग टेबल पर नाश्ता सजा रही थी। गरमा-गरम पराठे, आलू की सब्ज़ी, उपमा और फ्रूट जूस — सब कुछ सुव्यवस्थित था।टेबल पर जयराज पहले से बैठ चुके थे। उनके साथ जया और राजन भी थे; तीनों अख़बार देख रहे थे और चाय की चुस्कियों के बीच धीमे स्वर में बात कर रहे थे।तभी सीढ़ियों से नीचे उतरने की आहट हुई। सभी ने एक साथ गर्दन उठाकर ऊपर देखा।यश और युग दोनों धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतरते हुए नीचे आ रहे थे। दोनों भाई अभी भी थोड़ा-सा थके हुए लग रहे थे, जैसे रात को बहुत सारी बातें की हों — लेकिन चेहरों पर एक शांत सुकून था।”गुड मॉर्निंग,” यश ने सबसे पहले कहा, और दोनों अपनी-अपनी जगह आकर बैठ गए।जानवी ने मुस्कराकर दोनों की प्लेट में नाश्ता परोसा।तभी जयराज ने यश की तरफ देखा और धीमे से कहा,”अगर तुम चाहो, तो आज ऑफिस मत जाना।””मैं तो कहता हूँ,” राजन ने चुटकी ली,”आज किसी को भी ऑफिस नहीं जाना चाहिए।””बिलकुल!” जया ने हँसते हुए कहा,”आज का दिन थोड़ा खास है।””मैंने प्रदीप और प्रीति को बुलाया है,” राजन ने गंभीरता से कहा,”आज उनकी मौजूदगी में शादी की तारीख तय करनी है।”जयराज ने सिर हिलाते हुए कहा,”हाँ, जानवी ने मुझे बताया था… मगर मैं भूल गया था। अच्छा हुआ आपने याद दिलाया।”थोड़ी देर के लिए सब चुप हो गए। तभी यश ने अपनी बात तोड़ी और दादू की ओर देखकर कहा,”दादू, उस दिन आप कह रहे थे ना… कि आपको मेरे लिए एक लड़की पसंद है?”सभी ने चौंककर उसकी तरफ देखा। यश ने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा,”तो मैं… उस लड़की से मिलना चाहूंगा।”उसके शब्दों के साथ ही पूरे टेबल पर एक गर्माहट-सी फैल गई। जानवी की आँखों में चमक आ गई, जय ने मुस्कराकर यश की पीठ थपथपाई और जयराज ने एक संतोष की साँस ली।राजन हँसते हुए बोले,”ये हुई ना बात! यही तो चाह रहे थे हम लोग।”यश हल्के से मुस्कराया और नीचे देखते हुए चाय की प्याली उठाई। शायद ये मुस्कान एक नए सफ़र की शुरुआत थी… एक नई मंज़िल की तरफ़ पहला कदम।
sitaron se aage episode 113
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जयराज धीरे-धीरे चलकर यश के कमरे से बाहर आया। पीछे मुड़कर एक नज़र अपने बेटे पर डाली, फिर एक गहरी साँस लेकर चला गया। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन एक उम्मीद भी। उसे अब भी यकीन था कि उसका बेटा समझेगा, और जब समझेगा तो सही रास्ता जरूर चुनेगा।जैसे ही जयराज गया, उसी समय…







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