फोन के दूसरी तरफ किसी ने कुछ कहा, जिसे सुनकर राजन जी का चेहरा अचानक गंभीरता और उत्सुकता से भर गया। उन्होंने एक क्षण रुककर जवाब दिया, “अच्छा… सचमुच?” फिर हल्के से मुस्कराए। टेबल पर बैठे सभी की ओर देख कर उन्होंने कहा, “हाँ, बिल्कुल। यश की तरफ से भी यही जवाब है।” पूरा परिवार एक बार फिर मुस्कुरा उठा। अब सबकी नजरें राजन जी पर थीं… सब जानना चाहते थे कि शिवानी ने क्या कहा। “शिवानी की तरफ से हाँ है,” राजन ने खुशी से कहा। यश थोड़ा हैरान रह गया। उसे इतनी जल्दी यह उम्मीद नहीं थी कि शिवानी हाँ कह देगी। “तो फिर ठीक है,” जयराज बोले, “कल ही शिवानी को बुलाओ… और साथ में परी को भी। जान्वी, तुम दोनों को स्काई मॉल की शॉपिंग करवाओ। फिर युग की शादी के साथ ही इन दोनों की भी शादी हो जाएगी।” “बस! फिर हमारी ज़िम्मेदारियाँ खत्म,” जयराज ने हँसते हुए कहा। जानवी ने तुरंत टोका, “ऐसे कैसे खत्म? शादी होने से ज़िम्मेदारी कब खत्म होती है? बिल्कुल नहीं होती।” जया भी हँसते हुए बोली, “हम दोनों को देख लो… पोते-पोतियों की शादी करवाने की चिंता लगी है और तुम बेटों की शादी करके ही खुद को फ्री समझ रहे हो!” राजन ने चुटकी ली, “लगता है बेटों की शादी हो रही है, तो मोह-माया खत्म हो रही है!” जयराज मुस्कराए, “नहीं… मैं ये नहीं कह रहा। मेरा मतलब बस इतना था कि जब बच्चों को अच्छे जीवनसाथी मिलते हैं, तो एक सुकून महसूस होता है। शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, दो परिवारों का मिलन होती है। और जब रिश्ता अच्छे खानदान से जुड़ता है, तो विश्वास और बढ़ जाता है।” राजन हँसते हुए बोले, “बहुत जल्दी अकल आ गई तुम्हें इस बात की!” “डैड, मेरे बच्चों की शादी हो रही है, कम से कम थोड़ी इज़्ज़त से बात तो करो मुझसे!” जयराज ने हल्के ग़ुस्से में कहा, और फिर सब हँस पड़े। हँसी-खुशी के इस माहौल में थोड़ी ही देर में सब लोग अपने-अपने कमरों की ओर बढ़ गए। — कमरे में जाकर युग ने तुरंत परी को कॉल लगाया। फोन उठाते ही परी ने गुस्से से कहा, “मिल ही गया आपको टाइम मुझे कॉल करने का?” “क्या करता यार, आज काम बहुत था। इसलिए टाइम नहीं मिल पाया। लेकिन एक खुशखबरी है…” युग ने मुस्कराते हुए कहा। “क्या खुशखबरी?” परी ने पूछा। “यश भी शादी फिक्स हो गई है!” “सच में? तो अब मैं जेठानी बन रही हूँ?” परी खिलखिलाकर हँस पड़ी। “अगर तुम कहो, तो अभी मिलने आ जाऊँ?” युग ने शरारत से कहा। “बिल्कुल नहीं! मॉम ने सख्त मना किया है। शादी के बाद ही मिलेंगे।” “मगर यार… तुम्हारे बिना मन नहीं लगता…” युग ने धीरे से कहा। “मेरा भी नहीं…” परी ने भी मुस्कुरा कर जवाब दिया। इसके बाद दोनों देर तक यूँ ही छोटी-छोटी बातें करते रहे। उस पल के लिए ज़िंदगी बेहद हल्की और प्यारी लग रही थी। मगर यश के मन के किसी कोने में अब भी सवाल था — “क्या शिवानी सच में इतनी आसानी से शादी के लिए मान गई?” महक की यादें अब फीकी पड़ चुकी थीं, और यश का मन उलझा हुआ था। वह जानता था कि शिवानी जैसी लड़की — जो अपने गुस्से, आत्मसम्मान और अकेलेपन के लिए जानी जाती है — वह इतनी जल्दी और सहजता से शादी के लिए कैसे मान सकती है? उसी समय दूसरी ओर — शिवानी और उनकी माँ — दोनों साथ में उसके कमरे में बैठी थीं। माहौल शांत था, पर भीतर बहुत कुछ चल रहा था… शिवानी की माँ ने उसकी ओर देखते हुए पूछा, “अब तुम्हारा मूड क्यों खराब है, शिवानी? तुमसे पूछकर ही तो बात आगे बढ़ाई गई है। अब जब तुमने ‘हाँ’ कह दिया है, तो तुम्हें खुश होना चाहिए, बेटा।” शिवानी ने धीमी आवाज़ में जवाब दिया, “मैं खुश हूँ, मॉम…” “तो फिर तुम्हारे चेहरे पर वो खुशी क्यों नहीं दिख रही?” माँ ने सीधे पूछा। “सच-सच बताओ, क्या बात है?” शिवानी कुछ क्षण चुप रही, फिर गहरी सांस लेते हुए बोली, “मुझे लगा था… कि वो शादी से मना कर देगा। मुझे सच में नहीं लगा था कि वो ‘हाँ’ कह देगा…” “क्यों? उसने ऐसा क्या कहा था जब तुम दोनों अकेले में मिले थे?” “। हम कॉलेज में साथ पढ़ते थे। हमारी कभी नहीं बनी थी… बात-बात पर टकराव होता था।” शिवानी बोली। शिवानी की माँ मुस्कुरा दीं, “मतलब वो तुम्हें अच्छे से जानता है…” शिवानी चौंक कर अपनी माँ के चेहरे की ओर देखने लगी। “उसे पता है मेरी बेटी कैसी है — थोड़ी सी खड़ूस ज़रूर है, मगर दिल से बहुत प्यारी है,” माँ ने प्यार से कहा। “अब जब तुमने हाँ कहा है, तो दिल से स्वीकार करो। तुम्हारे दादाजी ने भी तुमसे पूछकर ही फोन किया था। और तुम्हारी होने वाली सास का भी फोन आ चुका है — उन्होंने कल शॉपिंग के लिए बुलाया है।” शिवानी अचानक घबरा गई, “क्या? अभी एक घंटा भी नहीं हुआ ‘हाँ’ कहे हुए… और शॉपिंग के लिए भी फोन आ गया?” “हां बेटा, वो लोग उत्साहित हैं।” “मुझे नहीं समझ आता, मॉम,” शिवानी उठ कर खड़ी हो गई, “इतनी जल्दी-जल्दी सब क्यों हो रहा है? कहानी बैल होगा अपनी अमीरी तो नहीं दिख रहे जानबूझकर हमारा भी एक स्टेटस है… हमारी भी इज्ज़त है। और पापा ने हमेशा यही कहा है कि तुम्हारी शादी भी उसी गरिमा और ठाठ से होगी, जैसे सिंघानिया खानदान में होती है।” “बिलकुल, बेटा,” माँ ने गंभीरता से कहा, “इस बात की तुम फिक्र मत करो। तुम्हारे पापा और दादाजी हर छोटी-बड़ी बात का ध्यान रखेंगे।” “तो क्या सारा खर्च वही उठाएँगे? मेरी शादी में सब कुछ वही करेंगे? मेरा एक छोटा भाई भी है, उसकी भी ज़िंदगी है, उसकी पढ़ाई है। मैं पहले ही बता देती हूँ — मुझे ज्यादा दिखावा पसंद नहीं। अगर उन्होंने कहीं पैसे और रुतबे का घमंड दिखाया तो मैं पीछे हट जाऊँगी, चाहे शादी टूट जाए।” माँ ने माथा पकड़ लिया, “हाय, ये ज़िद्दी लड़की! कभी ठीक नहीं होगी!” “ठीक है, कल सुबह अच्छे से तैयार होकर जाना,” माँ ने समझाते हुए कहा, “आज की तरह यूँ ही उठ कर मत चल देना। वहाँ तुम्हारी ससुराल वाले भी होंगे… और तुम्हारी होने वाली जेठानी भी। दोनों भाइयों की सगाई की तैयारियाँ साथ-साथ चल रही हैं। हर निगाह तुम पर होगी, ज़रा ध्यान रखना।” शिवानी ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “देखो मॉम, मैं एक बात और साफ कह देती हूँ — अगर वहाँ किसी ने पैसे, शो-ऑफ या स्टेटस का नाटक किया तो मैं बर्दाश्त नहीं करूंगी।” “अरे, इतनी जल्दी मत सोचो,” माँ ने कहा, “मुझे तुम्हारी सास तो बहुत अच्छी लगीं। बहुत ही प्यार से देख रही थीं तुम दोनों को… खासतौर पर तुम्हें।” शिवानी ने थोड़ा सा मुस्कराकर कहा, “ठीक है, मॉम। कल ही पता चल जाएगा कि वो लोग कैसे हैं…”
sitaron se aage episode 117
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फोन के दूसरी तरफ किसी ने कुछ कहा, जिसे सुनकर राजन जी का चेहरा अचानक गंभीरता और उत्सुकता से भर गया। उन्होंने एक क्षण रुककर जवाब दिया, “अच्छा… सचमुच?” फिर हल्के से मुस्कराए। टेबल पर बैठे सभी की ओर देख कर उन्होंने कहा, “हाँ, बिल्कुल। यश की तरफ से भी यही जवाब है।” पूरा परिवार…







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