“मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी सीरीज़ पसंद आ रही होगी…” तपस्या ने तेजस के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। वह जानती थी कि तेजस एक घमंडी और लड़कियों में रुचि रखने वाला इंसान है। इसलिए वह उससे दूरी बनाकर ही रखती थी। उसका ध्यान सिर्फ अपने काम और ऑफिस के डिसिप्लिन पर था। वह ज़्यादा बात नहीं करती थी। अगर मीटिंग के लिए बाहर भी जाती, तो तेजस से दूरी बनाकर चलती थी — और उसकी आंखों के सामने आने से भी बचती थी। तेजस ने भी ये नोटिस किया था। “…चलो, अच्छी बात है,” वह मन में सोचता। — इन दिनों, प्रीति ने तेजस के करीब आने की बहुत कोशिश की थी, मगर उसकी कोई बात नहीं बन सकी। एक-दो बार जब तेजस और राहुल दोनों ऑफिस में नहीं थे, प्रीति ने जानबूझकर कुछ ज़रूरी फाइलों में छेड़छाड़ की कोशिश की थी। लेकिन तपस्या की वजह से वह कुछ कर नहीं पाई। तपस्या को उस पर शक होने लगा था। अब प्रीति को तपस्या बहुत बुरी लगने लगी थी — क्योंकि जब राहुल ऑफिस में नहीं होता था, तो तपस्या उसकी जगह सब संभाल लेती थी। “अब इसे तो ऑफिस से निकलवाना पड़ेगा,” प्रीति ने सोच लिया था। — तपस्या को फैमिली का कुछ ज़रूरी काम था, तो उसने राहुल से दो-तीन दिन की छुट्टी ले ली थी। तेजस को इसके बारे में कुछ नहीं पता था। जब तेजस दो-तीन दिन बाद ऑफिस आया, तो उसने आते ही कॉफी मांगी। आज उसकी कॉफी प्रीति लेकर आई थी। “तपस्या कहां है?” उसने पूछा। “राहुल सर ने मुझे कॉफी लाने को कहा था। तपस्या आज अभी तक आई नहीं है…” “ठीक है, कॉफी रख दो… और तुम जा सकती हो।” तेजस ने जैसे ही कॉफी का पहला सिप लिया, उसका मुंह बन गया — “कितनी बेस्वाद कॉफी है…” अब उसे रोज़ तपस्या के हाथ की कॉफी की आदत लग चुकी थी। — उसने राहुल को फोन करके ऑफिस में बुलाया। “काम कैसा चल रहा है?” तेजस ने पूछा। “सब ठीक है सर। आपकी मीटिंग कैसी रही?” “बहुत अच्छी। तपस्या ने जो फाइल तैयार की थी, उन्हें बहुत पसंद आई। आज दोपहर के बाद एक और मीटिंग है। तपस्या को भी साथ चलना पड़ेगा…” “लेकिन वो तो छुट्टी पर है,” राहुल बोला। “हमें आधे घंटे में निकलना है। उसे अभी फोन लगाओ।” राहुल ने तपस्या को फोन किया, पहली बार में उसने कॉल नहीं उठाया। “दोबारा लगाओ,” तेजस ने कहा। — “तपस्या, तुम कहां हो?” राहुल ने पूछा। “क्या हुआ सर?” “बहुत ज़रूरी मीटिंग है। तुम्हें ऑफिस आना होगा। कहां हो इस वक़्त?” “मैं सुपरमार्केट में हूं, सर…” “तो जल्दी से ऑफिस पहुंचो।” “सर, मैं तो छुट्टी पर थी… कपड़े भी वैसे ही पहने हैं…” “कोई बात नहीं, जो पहना है, उसमें ही आ जाओ,” राहुल ने कहा। — तपस्या दस मिनट में ऑफिस पहुंच गई। उसने क्रीम कलर का कुर्ता और सफेद प्लाज़ो पहना था। कुर्ते पर रेड ब्लॉक प्रिंटिंग थी। बाल पीछे बंधे हुए थे। वह बेहद प्यारी लग रही थी। तेजस ने भी एक नज़र उसे देखा। “मैंने तुम्हें कहा था ना, ऑफिस में वेस्टर्न कपड़े पहनने को…” “सर, मैं सीधा मार्केट से आ रही हूं… मैं छुट्टी पर थी…” “ठीक है, अब जल्दी चलो। हमें मीटिंग के लिए निकलना है।” — तीनों साथ मीटिंग पर निकल गए। राहुल ड्राइव कर रहा था, तेजस उसके साथ बैठा था, और तपस्या पीछे। सारे रास्ते तपस्या फाइलें पढ़ती रही। तेजस ने देखा — वह सिर्फ काम पर फोकस कर रही थी। वरना उसकी ऑफिस की बाकी लड़कियां बाहर जाते ही उसे इम्प्रेस करने में लग जाती थीं। — मीटिंग बहुत अच्छी रही। “तुमने बहुत अच्छा काम किया, तपस्या,” तेजस ने कहा। “थैंक यू सर,” तपस्या ने मुस्कराकर जवाब दिया। — मीटिंग खत्म होने के बाद, “मुझे साइट पर जाना है,” राहुल ने कहा। “क्यों? क्या हुआ?” “मीटिंग के दौरान कॉल आया था — साइट पर कुछ प्रॉब्लम है…” “मुझे सुपरमार्केट जाना है, मैं ऑटो ले लूंगी…” तपस्या बोली। “नहीं, तुम सर के साथ चली जाओ… वहां से ऑटो ले लेना। वैसे भी मौसम खराब लग रहा है,” राहुल ने कहा। “ठीक है,” तपस्या ने धीमी आवाज़ में कहा। अब वह तेजस के साथ अकेले गाड़ी में थी। — रास्ते में वह बाहर देख रही थी। तेजस नोट कर रहा था कि वह उसे पूरी तरह से इग्नोर कर रही है। उसे यह बात चुभने लगी थी। “ये मुझे ऐसे इग्नोर करके साबित क्या करना चाहती है?” तभी हल्की बारिश शुरू हो गई, ठंडी हवा भी चल रही थी। — अचानक गाड़ी का बैलेंस बिगड़ गया। तेजस ने गाड़ी रोकी। “क्या हुआ सर?” तपस्या ने पूछा। “लगता है टायर पंचर हो गया है…” तेजस नीचे उतरकर टायर देखने लगा। बारिश अब तेज हो चुकी थी। “बाहर आओ, मेरी हेल्प करो…” तेजस ने तपस्या को पुकारा। “मैं भीग जाऊंगी सर…” “मैं भी तो भीग ही रहा हूं… कुछ नहीं होगा, बाहर आओ।” — तपस्या बाहर आ गई। तेजस ने डिग्गी से एक्स्ट्रा टायर निकाल लिया। “गाड़ी के पीछे जो टूल्स हैं, वो निकालो,” उसने कहा। तपस्या ने सामान निकाला और मदद करने लगी। अब वे दोनों भीग चुके थे। — अचानक, तेजस का ध्यान तपस्या पर गया। वह पूरी तरह भीग चुकी थी। उसके हल्के कपड़े बदन से चिपक गए थे। हर कट, हर सिलुएट साफ नजर आ रहा था। गोरे गाल, कांपते होंठ, और भीगी पलकों वाली वो तपस्या — तेजस को पहली बार दिल से ‘खूबसूरत’ लगी। तपस्या ने उसकी नज़रों को महसूस किया और अपने आप को अपनी बाहों में ढकने की नाकाम कोशिश की। — टायर बदलने के बाद दोनों गाड़ी में बैठ गए। तेजस अब बस तपस्या को ही देखे जा रहा था। “नॉट बैड…” उसने गाड़ी चलाते हुए बुदबुदाया। “सर, आपने कुछ कहा?” तपस्या ने पूछा। “नहीं…” तेजस मुस्कुराया। — “सर, मुझे यहीं छोड़ दीजिए…” तपस्या ने कहा। “तुम्हें तो सुपरमार्केट जाना था?” “पहले घर जाऊंगी… कपड़े बदलने हैं। वरना बीमार हो जाऊंगी।” “अगर चाहो, तो ऑफिस में तुम्हारे लिए कपड़े मंगवा सकता हूं…” तेजस ने कहा। तपस्या को उसके इस अचानक बदले व्यवहार पर हैरानी हुई। “नहीं सर, मैं घर जाऊंगी। आप मेरी फिक्र ना करें।” तेजस ने गाड़ी रोकी। तपस्या उतर गई। और तेजस के दिमाग में अब कई सवाल उठने लगे थे… — आपको मेरी सीरीज़ कैसी लग रही है? कमेंट करें, रेटिंग दें और मुझे फॉलो करना न भूलें। अगर कहानी पसंद आई हो तो स्टिकर देना भी याद रखें। क्या तेजस अब वाकई बदलने लगा है? या ये सिर्फ एक खेल है उसकी नजरों का? क्या तपस्या उसकी नजरों से बच पाएगी? जानिए आगे… —


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“मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी सीरीज़ पसंद आ रही होगी…” तपस्या ने तेजस के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था। वह जानती थी कि तेजस एक घमंडी और लड़कियों में रुचि रखने वाला इंसान है। इसलिए वह उससे दूरी बनाकर ही रखती थी। उसका ध्यान सिर्फ अपने काम और ऑफिस के डिसिप्लिन पर…

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