शाम तक वह किसी का फोन नहीं उठा रहा था। रात नौ बजे अचानक तपस्या का फोन आया। तेजस मुस्कराया। फोन उठाया। “…मैं कमरा नंबर 302 में पहुंच रही हूं… लेकिन उसके बदले मुझे पैसे चाहिए…” तेजस के चेहरे पर शिकारी मुस्कान आ गई। “ठीक है… आ जाओ…” उसने कहा”हर चीज़ का इलाज पैसा है… और इसे भी आखिरकार पैसे से तोड़ ही दिया मैंने…” “…आप मुझे एक रात के बदले जो देना चाहते हैं, दे दीजिए… मैं आपके कमरा नंबर 302 में पहुंच रही हूं। पैसे चाहिए मुझे… और जो आप चाहते हैं, उसके लिए मैं तैयार हूं…” “…ठीक है, आ जाओ… मैं वहीं पहुंच रहा हूं…” तेजस ने मुस्कुराते हुए कहा। “बहुत नखरे कर रही थी ये लड़की… कितना एटीट्यूड दिखा रही थी… हर चीज़ का इलाज पैसा होता है… और पैसा देख ही लिया, आखिर मान ही गई…” तेजस ने खुद से कहा। उसे लग रहा था की तपस्या पैसे के लिए मान रही है। — तपस्या ने फोन करने के कुछ ही देर बाद ब्लू मून होटल पहुंच गई थी। तेजस उससे पहले ही वहां मौजूद था। जैसे ही उसने दरवाज़ा खटखटाया, तेजस ने जल्दी से दरवाज़ा खोला। “आओ तपस्या… मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था… सच में बहुत तड़पाया है तुमने मुझे…” तपस्या चुपचाप अंदर आ गई। तेजस ने दरवाज़ा बंद करके लॉक कर दिया। — “इतनी नखरे करने की क्या ज़रूरत थी… मैं पहली बार में ही तुम्हें जो चाहिए था, दे देता… तुम्हें लगा तुम ऐटिट्यूड दिखाओगी तो रेट बढ़ जाएगा?” वह तपस्या के पास आकर बोला और उसके गले में बाहें डाल दीं। “मुझे लगा तुम अच्छे से तैयार होकर आओगी… कोई स्पेशल ड्रेस, थोड़ा मेकअप… लेकिन तुम तो वही ऑफिस वाले कपड़े पहनकर आ गई… कुर्ती और जींस… बाल बिखरे हुए… लेकिन चलो, वैसे भी तुम जैसे भी हो, मुझे अच्छी लगती हो…” तेजस बोलता रहा, लेकिन तपस्या एक शब्द नहीं बोली। वह बिल्कुल शांत खड़ी थी। — “चलो बेबी… शुरू हो जाओ… पहले मेरे लिए एक पैग बना लाओ…” तेजस सोफे पर बैठते हुए बोला। तपस्या चुपचाप ड्रिंक बनाकर ले आई। वह उसे पकड़कर पीने लगा। “तुम नहीं पियोगी?” “नहीं, मैं नहीं पीती…” तपस्या ने धीरे से कहा। “ठीक है, अब मेरे पास बैठो…” तपस्या उसके पास बैठ गई। तेजस ने उसका हाथ पकड़ लिया। “तुम्हारे हाथ इतने ठंडे क्यों हैं?” तेजस खन्ना ने कहा। “शायद एसी की वजह से…” तपस्या का स्वर बेहद शांत था। तेजस ने कुछ ड्रिंक पीकर ग्लास साइड में रख दिया। फिर वह तपस्या का चेहरा अपने हाथों में लेकर उसके करीब आने लगा। — तपस्या ने आंखें बंद कर लीं। “क्या तरीका है ये… मैं तुम्हें सब दे रहा हूं जो तुमने मांगा… और तुम ऐसा व्यवहार कर रही हो जैसे जबरदस्ती हो रही है… ये सब तुम्हारी मर्ज़ी से हो रहा है, याद है ना?” तेजस झुंझलाकर खड़ा हो गया। उसी समय तपस्या ने टेबल पर रखा ग्लास उठाया और एक ही बार में पी लिया। उसके बाद वह खड़ी हुई और खुद ही ग्लास में और शराब भरने लगी। धीरे-धीरे उसने दो-तीन पेग और ले लिए। जैसे वह सब भूलना चाहती थी। — शराब का असर तेज़ी से चढ़ा। उसे होश नहीं रहा कि क्या हुआ, कैसे हुआ। सबकुछ धुंधला सा होता गया। — सुबह जब उसकी आंख खुली, वह होटल के उसी कमरे में अकेली थी। तेजस वहां नहीं था। साइड टेबल पर एक ब्लैंक चेक पड़ा था — जिस पर तेजस के साइन थे। तपस्या ने एक नज़र उस चेक को देखा, फिर खुद को समेटती हुई उठी। वह वॉशरूम में गई और शावर चला दिया। गर्म पानी में भीगते हुए वह कांप रही थी। आइने में खुद को देखा — चेहरे पर, होंठों पर, गर्दन पर… जगह-जगह निशान थे। हर निशान रात की एक अधूरी कहानी कह रहा था। उसके मन में क्या चल रहा था यह वही जानती थी। — नहाने के बाद वह चुपचाप कपड़े पहनकर होटल से निकल गई। शायद वह उसकी जिंदगी की सबसे काली रात थी। उधर तेजस को अगले दिन विदेश रवाना होना था, इसलिए वह होटल से जल्दी निकल गया था। वह बहुत खुश था — “जो तुझमें है, वो किसी और में नहीं…” उसके मन में बस तपस्या की ही छवि घूम रही थी। वह दीवाना हो चुका था उसका। — पूरा पंद्रह दिन बीत गए। तेजस को विदेश में कोई काम था इसलिए उसे बाहर रुकना पड़ा। जब तेजस विदेश से लौटा और अगले दिन ऑफिस पहुंचा, तो उसने देखा ऑफिस में केवल राहुल था। तपस्या नहीं थी। — “तपस्या कहां है? आज नहीं आई?” तेजस ने पूछा। “सर, जिस दिन आप बाहर गए थे, उसी दिन से वह ऑफिस नहीं आई है। राहुल ने जवाब दिया उसे फोन करना चाहिए था…” तेजस ने कहा। “फोन तो कर रहा हूं… लेकिन उसका फोन बंद आ रहा है… कई बार ट्राई किया…” कहते हो राहुल थोड़ा परेशान हो गया। क्योंकि वो फोन ट्राई कर रहा था मगर फोन स्विच ऑफ था। तपस्या के ना आने की वजह से उसका वर्क लोड काफी बढ़ गया था। “तो फिर उसके घर जाकर देखिए, शायद कुछ पता चले…” तेजस ने सोचते हुए कहा। उसके ना आने का सुनकर परेशान तो वह भी बहुत था। “ठीक है, तुम उसका एड्रेस निकालो। मैं पता करता हूं…” — अब तेजस को सच में चिंता होने लगी थी। उसे यह नहीं पता था कि तपस्या ने उस रात के बाद से ऑफिस आना ही बंद कर दिया है। और सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि — अब तक उसने वह चेक भी कैश नहीं कराया था। तेजस के अकाउंट से पैसे निकाले जाने का कोई अलर्ट या मैसेज नहीं आया था। — “अगर वो पैसे चाहती थी, तो चेक कैश कराना चाहिए था… क्या अब उसे इस नौकरी की ज़रूरत नहीं? या फिर कोई और बात है…” तेजस के मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे। — > अब कहानी एक मोड़ पर आ चुकी थी। वो रात जिसने तपस्या को चुप कर दिया था — शायद वही रात तेजस को जवाबों से भरने वाली थी… — ✨ – 👇 रेटिंग दें, कमेंट करें और बताएं:

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शाम तक वह किसी का फोन नहीं उठा रहा था। रात नौ बजे अचानक तपस्या का फोन आया। तेजस मुस्कराया। फोन उठाया। “…मैं कमरा नंबर 302 में पहुंच रही हूं… लेकिन उसके बदले मुझे पैसे चाहिए…” तेजस के चेहरे पर शिकारी मुस्कान आ गई। “ठीक है… आ जाओ…” उसने कहा”हर चीज़ का इलाज पैसा है……







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