श्रेणी: series
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सगाई का समय आ चुका था।यश, जो महक को पीछे छोड़ कर अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ना चाहता था, उसने बहुत कोशिशें भी की थीं। ऐसा नहीं था कि उसे महक की याद नहीं आती थी, मगर अब वह जानता था कि उसका रिश्ता सिर्फ एक धोखे पर टिका हुआ था।और जब एक बार भरोसा…
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जैसे ही कॉल उठाई गई, उधर से आवाज़ आई— “तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे हो? क्या मैं गरीब हूँ, इसलिए मुझसे नाता तोड़ना चाहते हो?” महक एक्टिंग करते हुए इमोशनल होने का ड्रामा कर रही थी। शिवानी, जो उसके बगल में बैठी थी, चुपचाप यश को देख रही थी। उसकी आँखों में सवाल…
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लिफ्ट जैसे ही रुकी, दरवाज़ा खुला और वे सभी एक आलीशान से कॉरिडोर में उतर आए। यह वही जगह थी जो तीन अलग-अलग पेंटहाउस फ्लैट्स के आगे खुलती थी। वहाँ दो सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे, जिन्होंने झुक कर सभी को नमस्ते किया।वातावरण देखकर सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता था कि अगर बाहर से…
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sitaron se Aage 119
5–7 minutes·
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सभी लोग जब फुर्सत में आए, तो जयराज ने चारों ओर नज़र दौड़ाते हुए मुस्कुराकर कहा, “चलो, अब कुछ खाते हैं। बहुत थक गए हैं सब—बैठकर थोड़ी देर सुकून से बातें भी हो जाएँगी।” सभी ने सहमति में सिर हिलाया। मॉल के ही एक कोने में एक सुंदर सा रेस्टोरेंट था—शांत, आरामदायक और सुरुचिपूर्ण। वहीं…
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STaron Se aage 118
6–9 minutes·
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“देखो मॉम…” शिवानी ने एक गहरी साँस ली और दृढ़ स्वर में कहा, “मैं एक बात और साफ़ कर देती हूँ — अगर वहाँ किसी ने पैसे, शो-ऑफ या स्टेटस का दिखावा किया, तो मैं बर्दाश्त नहीं करूँगी।” उसकी माँ ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “अरे इतनी जल्दी मत सोचो। मुझे तो तुम्हारी सास…
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फोन के दूसरी तरफ किसी ने कुछ कहा, जिसे सुनकर राजन जी का चेहरा अचानक गंभीरता और उत्सुकता से भर गया। उन्होंने एक क्षण रुककर जवाब दिया, “अच्छा… सचमुच?” फिर हल्के से मुस्कराए। टेबल पर बैठे सभी की ओर देख कर उन्होंने कहा, “हाँ, बिल्कुल। यश की तरफ से भी यही जवाब है।” पूरा परिवार…
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सिंघानिया फैमिली लौट आई थी। दिन भर की भागदौड़ और मुलाक़ात के बाद अब घर का सन्नाटा अलग सुकून दे रहा था, मगर मनों के भीतर सवालों की हलचल बाकी थी। बच्चों से तो बात बाद में करनी थी। जानवी और राजन जानते थे कि अभी कुछ भी पूछना जल्दबाज़ी होगी। इसलिए रास्ते भर किसी…
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दरवाज़े की घंटी बजी। नीचे मौजूद स्टाफ ने आकर बताया कि प्रीति मैम और प्रदीप सर आ गए हैं। जानवी ने अपनी आँखें पोंछीं और मुस्कुराई। “अब चलो… उन्हें देखते हैं,” उसने जयराज से कहा। “मगर अब कभी मत छोड़ना,” जयराज ने उसकी हथेली कसकर पकड़ ली। “अब जब सब जान गए हैं, तो जाने…
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घर का माहौल हल्का-फुल्का था। सब लोग बैठे बातें कर रहे थे। हँसी-मज़ाक भी चल रहा था, लेकिन माहौल के बीच एक ठहराव भी था—जैसे कुछ खास बात होने वाली हो।”मैं सोच रहा हूँ…”, यश ने अचानक कहा। सभी की नज़रें उसकी ओर उठ गईं। “कि मैं दादाजी की पसंद की लड़की से मिलना चाहता…
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जयराज धीरे-धीरे चलकर यश के कमरे से बाहर आया। पीछे मुड़कर एक नज़र अपने बेटे पर डाली, फिर एक गहरी साँस लेकर चला गया। उसके चेहरे पर थकान थी, लेकिन एक उम्मीद भी। उसे अब भी यकीन था कि उसका बेटा समझेगा, और जब समझेगा तो सही रास्ता जरूर चुनेगा।जैसे ही जयराज गया, उसी समय…